जेल में बंद रामधीर सिंह को कोर्ट से मिलेगी राहत या नहीं, जानिये  'सिंह मेंशन' से क्या है कनेक्शन

    जेल में बंद रामधीर सिंह को कोर्ट से मिलेगी राहत या नहीं, जानिये  'सिंह मेंशन' से क्या है कनेक्शन

    धनबाद (DHANBAD): धनबाद के मजबूत घराने 'सिंह मेंशन' के रणनीतिकार व विधायक स्व. सूर्यदेव सिंह के भाई रामधीर सिंह की याचिका पर हाईकोर्ट में 16 अगस्त को अंतिम सुनवाई होगी. रामधीर सिंह अभी विनोद सिंह हत्याकांड में लोअर कोर्ट से मिली आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं. लोअर कोर्ट के आदेश के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, जिसकी अंतिम सुनवाई 16 अगस्त को बताई गई है.  रामधीर सिंह को लोअर कोर्ट ने विनोद सिंह व उनके चालक की हत्या में उम्र कैद की सजा सुनाई थी और रामधीर सिंह के अग्रज व पूर्व मंत्री बच्चा सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था.  

    15 जुलाई' 1998 को की गई थी विनोद सिंह की हत्या 

    विनोद सिंह सकलदेव सिंह के भाई थे, हालांकि 99 में सकलदेव सिंह की भी फिल्मी स्टाइल में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. 15 जुलाई' 1998 को कतरास हटिया शहीद भगत सिंह चौक के पास ताबडतोड़ गोलियों से हमला कर विनोद सिंह और उनके चालक मन्नु अंसारी को मौत के घाट उतार दिया गया था. हत्या के  बाद मृतक के भाई दून बहादुर सिंह ने पुलिस को बयान दिया था कि विनोद सिंह कोल डंप जाने के लिए अपनी नई एम्बेस्डर कार से निकले थे. कार मन्नु अंसारी चला रहा था.  पीछे-पीछे वह  भी अपनी महिंद्रा जीप से निकले थे.पंचगढी बाजार में दोनों गाडियां जाम में थोडी देर फंसी रही. 

    सुबह  करीब 8.40 बजे  विनोद सिंह को मारी गई थी गोली 

    सुबह  करीब 8.40 बजे वे लोग कतरास हटिया भगत सिंह चौक के पास जैसे ही पहुंचे, एक सादे रंग की मारुति कार दोनों गाडियों को ओवरटेक कर आगे रुक गई. मारुति से तीन लोग उतरे और विनोद सिंह की गाड़ी पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी.  मेरी गाडी करीब 50 गज दूर थी.  मैं डर से वहीं रुक गया, फयारिंग के बाद तीनों मारुति में बैठे और राजगंज की ओर भाग गए.  हमलोग दौड़कर एम्बेस्डर के पास पहुंचे, विनोद सिंह और मन्नु खून से लथपथ गिरे हुए थे. भागते हुए तिलाटांड सेंट्रल अस्पताल गए और डॉक्टर  को लेकर पुन: घटना स्थल पर लौटे.  हमलावरों में रामधीर और राजीव रंजन सिंह शामिल थे. वही ,बिहार जनता खान मजदूर संघ के महामंत्री और जनता दल के नेता सकलदेव सिंह की हत्या 25 जनवरी, 1999 को भूली के निकट हीरक रोड पर कर दी गई थी.  


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