दिल्ली में बहशी प्रेमी की करतूत के बाद उठ रहे सवाल, अधिकार तो चाहिए लेकिन कर्तव्य क्यों भूल रहे लोग

    दिल्ली में बहशी प्रेमी की करतूत के बाद उठ रहे सवाल, अधिकार तो चाहिए लेकिन कर्तव्य क्यों भूल रहे लोग

    धनबाद(DHANBAD):  झारखंड के साहिबगंज में रुबिका पहाड़िन  की हत्या करने के बाद उसके शव को कई दर्जन टुकड़ों में काटकर अलग-अलग फेंक दिया गया था. ऐसा करने वाला और कोई नहीं बल्कि उसका पति ही निकला. ऐसा करने वाला व्यक्ति किस मानसिकता का होगा, इसका अंदाज लगाना कठिन  है. इधर, दिल्ली में एक बार फिर मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है. एक बहशी  प्रेमी ने 16 वर्षीय किशोरी की चाकू से गोद -गोद कर हत्या कर दी. इस घटना से यह बात भी सामने आती है कि हम अपना हक पाने, मांगने के लिए तो कहीं भी लड़ जाते हैं लेकिन कर्तव्य या जिम्मेदारी निभाने की जब बारी आती है तो बगल से निकल जाते है. ऐसा ही दिल्ली में किशोरी की हत्या के समय हुआ है. जिस समय बहशी  प्रेमी किशोरी पर ताबड़तोड़ चाकू घोंप  रहा था, उस वक्त लोग तमाशबीन बने रहे. किनारे से गुजरते रहे. हालांकि पुलिस ने बहशी प्रेमी को  उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार कर लिया है. वह अपने बुआ के घर घटना के बाद रहने गया  था. 

    किशोरी के शरीर पर बीस से अधिक वार किये गए 
     
    आरोपी ने किशोरी पर 20 से अधिक वार किये. आरोपी और मृतिका के बीच चर्चा के मुताबिक प्रेम संबंध थे. शनिवार को किसी बात को लेकर दोनों में झगड़ा हो गया था. लड़की रविवार शाम को अपनी सहेली की बेटी के जन्मदिन की पार्टी के लिए खरीदारी करने गई थी, तभी घनी आबादी वाले इलाके में आरोपी ने उसे रोक लिया और मार डाला. इस घटना को  किसी के लिए भी भुलाना मुश्किल है लेकिन इसके साथ ही घटना के वक्त, जो शर्मनाक उदासीनता देखी गई, उसे  भी किसी अपराध से कम नहीं माना जाना चाहिए. हत्यारा एक किशोरी को मारता रहा और लोग  आस पास से गुजरते रहे. हत्यारा चाकू से लगातार वार  ही नहीं किया बल्कि उसके सिर भी कुचल डाले. आज परिस्थितियां हो गई है कि सैकड़ा में एक दो लोग ही ऐसे हैं ,जो सड़क पर किसी अपराध को रोकने के लिए सामने आते है. दिल्ली में लड़की बहशी  प्रेमी से  अकेली जूझती    रही और अंततः समाज की उदासीनता से वह  हार गई. 

    पुलिस त्वरित  कार्रवाई कर हत्यारे तक पहुंच गई है

    यह सुकून देने वाली बात है कि पुलिस त्वरित  कार्रवाई कर हत्यारे तक पहुंच गई है. अगर ऐसी घटनाओं पर गौर किया जाए तो पता चलेगा कि ऐसी हत्याएं लगातार बढ़ती जा रही है. दूसरों पर अपनी मर्जी जबरन थोपने  के  अपराध की संख्या लगातार बढ़ रही है. एक सभ्य  समाज के रूप में  नागरिकों को उनके कर्तव्यों का बोध कराना भी जरूरी हो गया है. सवाल यही है कि आखिर ऐसा करेगा कौन. सड़क दुर्घटना होती है तो लोग घायल को अस्पताल पहुंचाने के बजाय किनारा हो लेना बेहतर समझते है. यह   नहीं सोचते कि  घटना कभी भी किसी के साथ हो सकती है. आज के लोग short-tempered हो गए है. बात बात पर धीरज खो बैठते है. कोयलांचल में तो ट्रैफिक को लेकर यह समस्या हर रोज  होती है. गाड़ी कहीं सटी नहीं कि  मारपीट होने लगाती है. दिल्ली की इस घटना ने जितना लोगों को चौंकाया है, उससे कही अधिक  शर्मिंदा भी किया  है.

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो   



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