धनबाद शहर के नाक के नीचे बैठा हुआ था प्रिंस खान गैंग का "स्लीपर सेल",जानिए कैसे ऑपरेट हो रहा था यह मोस्ट वांटेड गैंग


धनबाद(DHANBAD): धनबाद शहर के नाक के नीचे कुख्यात प्रिंस खान गैंग का ,"स्लीपर सेल" बैठा हुआ था और किसी को कानों कान खबर तक नहीं थी. पुलिस कई राज्यों में खोज करती रही लेकिन जब पता चला तो एक से एक खुलासे हुए. प्रिंस खान गैंग का "रिमोट" पिछले एक साल से शहर के अंबिकापुर में रहने वाले विकास सिंह के हाथ में था. विकास सिंह ही प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से गैंग को लीड कर रहा था. यह सारी बातें पुलिस की जांच में सामने आई है.
रंगदारी वसूली में 25% की हिस्सेदारी विकास सिंह की
यह भी बात खुलकर आ गई है कि प्रिंस खान गैंग के रंगदारी वसूली में 25% की हिस्सेदारी विकास सिंह की थी . विकास सिंह इस काम में लगभग 30 लाख रुपए कमाए हैं. यह खुलासा विकास सिंह ने ही पुलिस पूछताछ में की है. यह भी बता दिया है कि इन पैसों को वह अपने संबंधी, रिश्तेदारों को दिया है. पुलिस के अनुसंधान में यह भी बात सामने आई है कि विकास सिंह हथियार सप्लाई का बड़ा खिलाड़ी है. अपने पैतृक गांव सहित अन्य जगहों से हथियार लाकर प्रिंस खान गिरोह को उपलब्ध कराता था. प्रिंस खान गिरोह को कारोबारी का नंबर, उनकी आर्थिक स्थिति के बारे में भी जानकारी देता था. इस गिरोह को आधार बनाकर पुलिस धनबाद के अपराधी गैंग को खंगालने में जुटी हुई है. पुलिस को अभी इस मामले में आदित्य सिंह ,रोशन सिंह, राघवेंद्र उर्फ राघव सिंह, शंकर साव,शुभम सिंह, विशाल मिश्रा ,प्रिंस के टेक्नोक्रेट हरियाणा के दीप की तलाश है. पुलिस को भरोसा है कि जल्द ही वह सभी गिरफ्तार कर लिए जाएंगे.
मेजर की गिरफ़्तारी के बाद धनबाद के लोगों को धमकी से मिलेगी राहत
इस बीच मेजर के नाम से आतंक मचाने वाला कतरास का रहने वाला नसीम अंसारी ने स्वीकार किया है कि वह पहले वासेपुर के गैंगस्टर फहीम खान के लोहा स्क्रैप के ऑक्शन कारोबार में लोडिंग मुंशी का काम करता था. 2008 में पड़ोस के ही फिरोज अंसारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. 2008 में हत्या होने के बाद वह 4 साल तक जेल में रहा. इस मामले में उसे 20 साल की सजा हो गई. उसके बाद वह हजारीबाग जेल में शिफ्ट हो गया. 2015 में पैरोल पर बाहर आया और भाग कर दिल्ली चला गया. उसके बाद 2021 में वह अपने ससुराल साउथ आसनसोल में छिप कर रह रहा था. वह अपना नाम बदल दिया था. बदले नाम पर आधार कार्ड से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस तक बनवा लिया था. जो भी हो लेकिन जिस कथित मेजर के नाम से धनबाद के कारोबारी डरे,सहमे रहते थे, वही मेजर की पुलिस हिरासत में घिग्घी बंधी रही.उम्मीद की जानी चाहिए की अब मेजर की आवाज कम से कम धमकी देने के मामले में धनबाद को नहीं सुनाई पड़ेगी.
रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो
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