कांग्रेस कार्यालय में हुआ संवाददाता सम्मेलन का आयोजन, अडानी मामले की जांच के लिए की JPC गठन की मांग

    कांग्रेस कार्यालय में हुआ संवाददाता सम्मेलन का आयोजन, अडानी मामले की जांच के लिए की JPC गठन की मांग

    रांची(RANCHI): अडानी मामले पर कांग्रेस लगातार हमलावर है. झारखंड प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया गया. मामले के बारे में बोलते हुए प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि अडानी समूह के शेयरों में निरंतर गिरावट के कारण 31 दिसंबर 2022 से समूह में एलआईसी के शेयरों के मूल्य में आश्चर्यजनक रूप से 52,000 करोड़ रुपये की गिरावट आई है. इनका मूल्य अब मात्र 32,000 करोड़ रुपये रह गया है और एलआईसी तथा इसके करोड़ों पॉलिसीधारकों द्वारा कमाया गया सारा लाभ, जो अब हम सभी जानते हैं कि स्टॉक मार्केट में हेरफेर और मनी लॉन्ड्रिंग के कारण हुआ था, उस सारे लाभ का सफाया हो गया है और एलआईसी को एक बहुत बड़ा नुकसान हुआ है. किसने भारत की वित्तीय प्रणाली के इस स्तंभ को आपके पसंदीदा व्यवसायी के लिए इतने जोखिम भरे सौदे में शामिल होने के लिए मजबूर किया? भारत के नागरिकों की बचत के साथ खेले गए इस जुए के लिए आपको कब जवाबदेह ठहराया जाएगा?

    लाखों निवेशकों की कमाई डूब रही है

    उन्होंने आगे कहा कि आज जबकि एमएससीआई एस-पी डाउ जोन्स और एफटीएसई रसेल जैसी प्रमुख मार्केट इंडेक्स प्रदाता कंपनियां अदानी समूह की फर्मों के भारांक; व्हेटेज की समीक्षा कर रही हैं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ;एनएसई निवेशकों की सुरक्षा के लिए कोई गंभीर कार्रवाई करने में विफल रहा है. इसके विपरीत एनएसई ने 17 फरवरी 2023 को घोषणा की कि वर्तमान में शेयर बाजारों में डूब रही अदानी समूह की कंपनियों में से अतिरिक्त 5 को 14 सूचकांकों में शामिल किया जाएगा. इससे कई वित्तीय सलाहकारों ने अपने ग्राहकों को इन फंडों में निवेश न करने की सलाह दी है, जो उन सूचकांकों का बेंचमार्क के रूप में उपयोग करते हैं. लेकिन लाखों असहाय निवेशकों पर अभी भी उनकी गाढ़ी कमाई से इन डूब रही अडानी समूह की कंपनियों को उबारने के लिए मजबूर होने का खतरा मंडरा रहा है. राजेश ठाकुर ने बीजेपी से सवाल किया कि क्या आप अपने करीबी दोस्त को इस संकट से उबारने के लिए एनएसई पर दबाव बना रहे हैं, सेबी को यह सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई करने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है कि लाखों निवेशकों का एक डूबते हुए व्यावसायिक समूह में निवेश कराके उनसे धोखाधड़ी न हो.

    JPC के अलावा कोई नहीं कर सकता निष्पक्ष जांच

    यदि प्रधानमंत्री और उनकी सरकार को इस मामले में जवाबदेह ठहराया जाना है तो जेपीसी के अतिरिक्त कोई भी अन्य समिति इस मामले में सारे दोषियों को वैध ठहराने और दोषियों को दोषमुक्त कराने की कवायद के अलावा और कुछ नहीं होगी.

    मामला ये नहीं है कि सेबी के कानून का उल्लंघन हुआ है, नियमों का उल्लंघन हुआ है, पर इससे आगे बढ़कर भी अलग-अलग मुद्दे हैं और पिछले 20 दिनों में रोज़ कांग्रेस पार्टी ने 3 सवाल उठाए हैं. आज भी सवाल उठाया गया है. आज भी तीन सवाल उठाए गए हैं, 60 सवाल हमने उठाए हैं. कोई सुप्रीम कोर्ट की जांच समिति इसका जवाब नहीं दे सकती. ये जवाब सिर्फ एक जेपीसी के माध्यम से ही मिल सकता है.

    तो ये समिति अपना काम करेगी, हमारी कोई अपेक्षाएं नहीं हैं. यहां-वहां कुछ नियम का उल्लंघन हुआ है, कुछ कानून का उल्लंघन हुआ है, पर जो मोटे मुद्दे हैं, जो हम रोज़ उठा रहे हैं, उन सवालों का जवाब सिर्फ जेपीसी के माध्यम से ही देश के सामने आ सकता है. क्योंकि ये जो मामला है वहाँ तक सीमित नहीं है. असली मामला ये है कि राजनीतिक और कॉर्पोरेट सांठ-गांठ है. कांग्रेस ने सारे आरोप लगते हुए एक JPC की मांग की है ताकि JPC इस मामले की निष्पक्ष जांच करे.

    रिपोर्ट: समीर हुसैन, रांची


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