झारखंड के इन जिलों में ह्यूमन मिल्क बैंक खोलने की तैयारी, जानें बैंक किस तरह से करेंगा काम, किन बच्चों को मिलेगा लाभ    

    झारखंड के इन जिलों में ह्यूमन मिल्क बैंक खोलने की तैयारी, जानें बैंक किस तरह से करेंगा काम, किन बच्चों को मिलेगा लाभ      

    दुमका(DUMKA):सामान्य रूप में बैंक शब्द सुनते ही हमारे जेहन में जो तस्वीर उभरकर सामने आती है, उसके केंद्र बिंदु में रुपया होता है, अर्थात बैंक मतलब रुपयों का लेन-देन के साथ उसे सुरक्षित रखने की गारंटी होती है. कई सामाजिक लोग बैंक शब्द जोड़कर मानवता की मिसाल भी पेश करते हैं, जैसे रोटी बैंक, कपड़ा बैंक, पुस्तक बैंक आदि, और ऐसे जगहों से कई जरूरतमंदों को फायदा भी मिलता है.

    झारखंड के इन जिलों में ह्यूमन मिल्क बैंक खोलने की तैयारी

    लेकिन जरा सोचिए, जब ब्लड बैंक की तरह ह्यूमन मिल्क के साथ बैंक शब्द जुड़ जाए तो किसका भला होगा, निःसंदेह आप भी कहेंगे नवजात का, क्योंकि मां के दूध को अमृत के समान माना जाता है, औऱ कई नवजात अमृतपान से वंचित रह जाते हैं. इसके भी कई वजह है. कभी जन्म के साथ ही नवजात के सिर से मां का साया उठ जाता है, तो कभी कलयुगी मां लोक लाज वश जन्म के बाद अपने जिगर के टुकड़े को लावारिश अवस्था में झाड़ियों में छोड़ जाती है, तो कई मां ऐसी भी होती है जो चाह कर भी अपने बच्चों को स्तनपान नहीं करा पाती. वजह चाहे जो भी हो लेकिन आनेवाले समय में झारखंड में दुमका सहित चार जिलों के नवजात अमृतरूपी मां के दूध से वंचित नहीं रहेंगे, क्योंकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर इन जिलों में ह्यूमन मिल्क बैंक स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है.

    जानें बैंक किस तरह से करेंगा काम

     जानकारी के अनुरूप पहली बार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर झारखंड सरकार दुमका के अलावा, बोकारो, रांची और हजारीबाग में दूध बैंक खोलने की तैयारी कर रही है. स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव के निर्देश ने महकमा ने दुमका में ह्यूमन मिल्क बैंक के लिए जमीन चिन्हित कर सरकार को सूचित कर दिया है. ये बैंक फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पास परित्यक्त कुपोषण उपचार केंद्र को तोड़कर बनाई जाएगी.

    जानें किन बच्चों को मिलेगा लाभ

    ह्यूमन मिल्क बैंक ब्लड बैंक की तरह काम करेगी. ब्लड बैंक में लोग दूसरों की जान बचाने के लिए रक्तदान करते हैं. इसी तरह से महिलाएं भी नवजात के लिए अपना दुग्ध बैंक को दान करेगी. ये दूध उन नवजात को दिया जाएगा, जिनके जन्म के समय उनकी मां का निधन हो गया है, या फिर जनम के बाद मां बच्चे को स्तनपान करने में असमर्थ होगी या फिर झाड़ियां में लावारिश अवस्था में मिले नवजात को भी इस बैंक में एकत्रित दूध पिलाया जाएगा. अस्पताल में जन्म या फिर लावारिश अवस्था में मिलने वाले बच्चों को अस्पताल के चिकित्सकों की सलाह पर दूध पिलाया जाएगा. जांच करने के बाद चिकित्सक तय करेंगे कि नवजात को एक दिन में कितनी मात्रा में दूध देना सही रहेगा.

    जानें दूध दान करने के लिए क्या है प्रक्रियाएं

    कोई महिला अपना दूध दान करने के लिए बैंक से संपर्क करती है, तो उसे कई तरह की जांच से गुजरना होगा. चिकित्सक महिला की जांच कर ये जानने का प्रयास करेंगे कि दूध दान लेने लायक है या नहीं, क्योंकि नवजात में बीमारी से ग्रसित होने की ज्यादा संभावना होती है, इसलिए हर तरह की जांच के बाद ही दूध दान की अनुमति प्रदान की जाएगी.

    जानें क्या कहना है फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक का

    इसको लेकर फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अनुकरण पूर्ति का कहना है कि सरकार ने बैंक खोलने के लिए चार जिलों में दुमका का भी चयन किया है. सरकार की ये योजना उन महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगी, जो जन्म के बाद अपना दूध पिलाने से वंचित रह जाती है. ऐसे में उनके पास बाजार का दूध पिलाने के अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता है. रक्त की तरह महिलाओं को दूध दान करने के लिए प्रेरित किया जाएगा.

    केंद्र सरकार की है योजना

    सिविल सर्जन डॉ बच्चा प्रसाद सिंह ने कहा कि ये केंद्र सरकार की योजना है. राज्य सरकार ने इस योजना को धरातल पर उतारने का निर्णय लिया है. दुमका में मानव दूध बैंक के लिए जमीन का चयन कर स्वास्थ्य विभाग को सूचित कर दिया है सरकार से निर्देश मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा. संताल परगना के लिए यह पहली और राज्य की यह चौथी बैंक होगी.

    योजना के सफल होने पर क्यों है संशय

      निःसंदेह यह योजना काफी अच्छी है, लेकिन इसकी सफलता पर संशय के बादल भी छाए रहेंगे, क्योंकि आज के समय मे जब धीरे-धीरे हमारे देश में पाश्चात्य संस्कृति हावी होने लगी तो यह जानते हुए कि नवजात के लिए मां का दूध अमृत के समान होता है, कई ऐसी मां है जो अपने बच्चों को अपना दूध पिलाने के बजाय बाजार में उपलब्ध डब्बा का दूध पिलाती है, इस बात से सभी वाकिफ हैं तभी तो स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक साल स्तनपान दिवस से लेकर सप्ताह तक का आयोजन किया जाता है. इसके बाबजूद डब्बा बंद दूध का कारोबार लगातार बढ़ रहा है. ऐसी स्थिति में जब मां अपने बच्चों को ब्रेस्ट फीडिंग से परहेज करने लगी हो तो ह्यूमन मिल्क बैंक में दूध दान करने के लिए कितनी मां सामने आएगी. यह कहना अभी जल्दबाजी होगी. एक तो महिलाओं में झिझक कुछ ज्यादा होती है ऊपर से दूध दान करने वाली महिलाओं को कई तरह की जांच प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिसके लिए कितनी महिला तैयार होगी यह कहना मुश्किल है.जो भी हो यह योजना अच्छी है और धरातल पर उतारने में विभाग को कड़ी मशक्कत करनी होगी क्योंकि मुश्किल जरूर है, असंभव नहीं.

    रिपोर्ट-पंचम झा


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