पंकज मिश्रा मामले में साहिबगंज के डीएसपी प्रमोद मिश्रा से ईडी ने पूछे कड़क सवाल, जानिए डीएसपी ने क्या दिया जवाब

    पंकज मिश्रा मामले में साहिबगंज के डीएसपी प्रमोद मिश्रा से ईडी ने पूछे कड़क सवाल, जानिए डीएसपी ने क्या दिया जवाब

    रांची(RANCHI): बड़हरवा टोल प्लाजा टेंडर विवाद में ईडी के सवालों का सामना कर रहे तत्कालीन डीएसपी प्रमोद कुमार मिश्रा ने ईडी के अधिकारियों को बेहद ही रोचक जवाब दिया है. बतलाया जा रहा है कि जब ईडी के अधिकारी प्रमोद कुमार मिश्रा से उसकी काली कमाई का राज उगलवाने के लिए प्रश्नों की बौछार कर रहे थें, पंकज मिश्रा से उसकी दोस्ती की वजहों की तलाश रहे थें, इस बात का जवाब मांग रहे थें कि उसने न्यायिक हिरासत रहते हुए पंकज मिश्रा से मुलाकात क्यों किया? बड़हरवा टोल प्लाजा टेंडर विवाद का सुपरविजन रिपोर्ट महज 24 घंटों कैसे फाइल कर दी गयी, इस मामले में उसकी कितनी काली कमाई हुई?

    प्रमोद मिश्रा के जवाब से ईडी अधिकारी भी हैरान?

    लेकिन इन तमाम सवालों को प्रमोद कुमार मिश्रा ने अपने मासूम जवाबों से किनारा करने की कोशिश की. उसके इस निरीह जवाब को सुन कर ईडी के अधिकारी भी संशय में पड़ गयें. दरअसल दावा किया जा रहा है कि ईडी के कठोर सवालों का सामना कर रहे प्रमोद कुमार मिश्रा ने बेहद शांत भाव से कहा कि साहब मेरे पास तो रहने के लिए अपना एक मकान भी नहीं है, काली कमाई क्या करुंगा?  यह काली कमाई किस बात की जब कोई एक अदना सा मकान भी नहीं बना सकें?

    देखिये, भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में राजीव अरुण एक्का का जवाब

    यहां यह भी बता दें कि कुछ इसी प्रकार का जवाब राजीव अरुण एक्का ने भी दिया था, मीडिया कर्मियों के सवालों का जवाब देते हुए एक्का ने कहा था कि तीस वर्षों की नौकरी में मैं एक ढंग का घर भी नहीं बना सका, आज भी मैं आदिवासी मुहल्लों में रहता हूं. किस बात की काली कमाई?

    यहां बता दें कि राजीव एक्का पर सत्ता के गलियारे में दलाल की पहचान बना चुके विशाल चौधरी के निजी कार्यालय में बैठकर सरकारी फाइलों का निष्पादन करने का गंभीर आरोप है, आरोप है कि गृह विभाग से जुड़ी फाइलों को विशाल चौधरी के कार्यालय में लाया जाता था, फिर वहां से फोन कर संबंधित पक्षों को बुलाया जाता था, उसके बाद शुरु होती थी उगाही का खेल.

    मूल प्रश्नों का जवाब देने के क्यों भाग रहे हैं अधिकारी

    लेकिन सवाल यह है कि क्या झारखंड में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में अधिकारियों के जवाब के पैट्रन में कोई बदलाव आ रहा है? क्या अब अधिकारी अपने उपर लगे मूल प्रश्नों का जवाब देने के बजाय इस बात की दुहाई देंगे कि उनका आवास कैसा है? उनके द्वारा किसी पॉश इलाके में मकान क्यों नहीं बनाया गया है? उनके बच्चे कहां पढ़ते हैं? दोस्ती करना और रखना गुनाह नहीं है? सब कुछ मानवीय आधार पर किया गया.


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