टीएनपी डेस्क (TNP DESK): झारखंड में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासत तेज हो गई है. भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे मतदाताओं को भ्रमित कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार गरीबों, आदिवासियों और मूलवासियों के नाम का इस्तेमाल कर अपने “छिपे एजेंडे” को आगे बढ़ा रही है.
आदित्य साहू ने मुख्यमंत्री के उस बयान को पूरी तरह निराधार बताया, जिसमें बीजेपी पर एसआईआर के जरिए आदिवासी, पिछड़े और मूलवासी समुदाय को मताधिकार तथा सरकारी योजनाओं से वंचित करने का आरोप लगाया गया था. उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है और इसका मकसद केवल यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र मतदाता छूटे नहीं और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो.
उन्होंने कहा कि एसआईआर कोई नई प्रक्रिया नहीं है, बल्कि आजादी के बाद से अब तक कई बार यह किया जा चुका है. आखिरी बार यह प्रक्रिया 2004 में हुई थी, जब केंद्र में गैर-भाजपा सरकार थी. ऐसे में अब इस प्रक्रिया पर सवाल उठाना पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है.
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सोरेन इस वजह से परेशान हैं क्योंकि उनके कार्यकाल में बड़ी संख्या में “फर्जी मतदाता” जोड़े गए हैं, जिनकी पहचान अब इस पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान हो सकती है. उन्होंने कहा कि राज्य में अवैध घुसपैठियों को बसाकर वोट बैंक मजबूत करने की कोशिश की गई है और अब जब उनकी पहचान होने का खतरा है, तो सरकार घबराई हुई है.
आदित्य साहू ने यह भी दावा किया कि झारखंड में मतदाता वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रही है, जो कई सवाल खड़े करती है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ क्षेत्रों में जनसंख्या के अनुपात से अधिक लाभुकों के नाम सामने आए हैं, जो जांच का विषय है. उन्होंने कहा कि एसआईआर एक “फिल्टर” की तरह काम करता है, जिससे वास्तविक और पात्र मतदाताओं को ही सूची में जगह मिलती है. इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत होती है और सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचता है.
अंत में उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से वास्तविक नागरिकों को कोई नुकसान नहीं होगा, बल्कि इससे उन लोगों पर रोक लगेगी जो फर्जी तरीके से लाभ उठा रहे हैं. भाजपा का मानना है कि पारदर्शी और निष्पक्ष मतदाता सूची ही मजबूत लोकतंत्र की नींव है, और इसी दिशा में यह कदम जरूरी है.


