हार्ट ऑफ द धनबाद टाउन ओवर ब्रिज की रेलिंग गिरी, हादसे के बाद भी प्रशासन नदारद

    हार्ट ऑफ द धनबाद टाउन  ओवर ब्रिज की रेलिंग गिरी, हादसे के बाद भी प्रशासन नदारद

    धनबाद(DHANBAD): हार्ट ऑफ द धनबाद टाउन, लाइफ लाइन ऑफ द धनबाद टाउन की 30 से 40 फीट रेलिंग गिर जाती है और 16 से 18 घंटे के बाद भी संबंधित विभाग के कान खड़े नहीं होते हैं. इसे धनबाद का दुर्भाग्य कहा जाए या संवेदन शून्यता. जी हां हम बात कर रहे हैं बैंक मोड़ ओवर ब्रिज का. शनिवार की रात ब्रिज का 30 से 40 फीट रेलिंग भरभरा कर गिर गया. गनीमत रही कि ये रेलिंग रात को गिरा, नहीं तो यह रास्ता चालू है, बाजार है, दुकाने हैं, बड़ा हादसा हो सकता था. दूसरे दिन 3:00 बजे तक रेलिंग को ना हटाया गया है और ना ही आगे की रेलिंग ना गिरे इसकी कोई व्यवस्था की गई है.

    1972 में हुआ था ओवरब्रिज का निर्माण

    आपको बता दें कि भले ही कोई बड़ी घटना ना हुई हो, लेकिन रेलिंग का गिरना बैंक मोड़ ओवर ब्रिज के जर्जर हालत को बताने के लिए काफी है. प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो रात 9:00 बजे के बाद अचानक जोरदार आवाज के साथ ब्रिज की दीवार से लगी लोहे की रेलिंग भरभरा कर गिर गई. रेलिंग के बगल से गुजरे कई केबल रेलिंग के गिरने में रुकावट जरूर बने. लेकिन, भारी भरकम रेलिंग होने के कारण उसे रोक नहीं पाए और केबल को तोड़ते हुए रेलिंग जमीन पर गिर पड़ी. सौभाग्यशाली रहे वहां के लोग कि दुकानें बंद हो चुकी थी, नहीं तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था, इससे इनकार नहीं किया जा सकता है. आपको बता दें कि 1972 में इस ओवर ब्रिज का निर्माण हुआ था. ओवरब्रिज के निर्माण के पीछे भी एक दर्दनाक कहानी है. झरिया से धनबाद आ रही यात्री बस बिजली के तार की चपेट में आ गई थी और उसमें सवार 1 दर्जन से अधिक लोग घटनास्थल पर ही मारे गए थे. उसके बाद  ब्रिज की मांग तेज हुई और 1972 में यह पुल लोगों को मिला.

    पिछले साल ही हुई थी पुल की जांच

    यहां यह भी कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि पिछले साल ही 3 दिनों तक पुल को बंद कर जांच आदि की गई थी. जांच हुई थी कि पुल का जीवन आगे कितना है,  कितना मजबूत है, मरम्मत की क्या जरूरत है. इसका प्रस्ताव सरकार के पास गया, लेकिन यह प्रस्ताव सरकार की फाइल में धूल फांक रहा है. पुल के बाहरी हिस्से में घास उग आए हैं. मतलब साफ है कि रख-रखाव पर ध्यान नहीं दिया गया है और ना ही सफाई की कोई व्यवस्था की जाती है. वहीं के रहने वाले शारदा ने बताया कि अगर रात नहीं होता तो बहुत बड़ा हादसा हो सकता था. यह पुल धनबाद का हृदय है और उसके बावजूद इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. मोहम्मद साजिद ने कहा कि घटना के बाद अभी तक कोई देखने के लिए नहीं आया है. जहां रेलिंग गिरी है, वह मुख्य सड़क है. रात को घटना होती तो बड़ी बात हो सकती थी. वहीं बैंक मोड़ चेंबर ऑफ कॉमर्स के महासचिव प्रमोद गोयल का कहना है कि अब यह चिंता का मामला बन गया है. हम कह सकते हैं कि धनबाद राम भरोसे है. जब तक भगवान चाहेंगे धनबाद के लोग जिंदा रहेंगे और जिस दिन भगवान की नजरें टेढ़ी हुई, हादसों की बाढ़ आ जाएगी.

    रिपोर्ट: शांभवी और प्रकाश, धनबाद  


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