विपक्षी गठबंधन VS चुनाव आयोग: ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था, अब आगे क्या-क्या हो सकते, पढ़िए विस्तार से !

    विपक्षी गठबंधन VS चुनाव आयोग: ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था, अब आगे क्या-क्या हो सकते, पढ़िए विस्तार से !

    धनबाद (DHANBAD) : विपक्षी गठबंधन और चुनाव आयोग के बीच वोट में कथित चोरी को लेकर जबरदस्त खींचतान चल रही है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोप  पर चुनाव आयोग ने भी जवाब दिया है. राहुल गांधी ने रविवार को बिहार के सासाराम से पदयात्रा शुरू की है. तो रविवार को ही चुनाव आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी के आरोपों को चुनौती दी है. मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि राहुल गांधी को या तो एफिडेविट देना होगा या देश से माफी मांगनी होगी, तीसरा कोई विकल्प नहीं है. 7 दिनों में हलफनामा नहीं मिला तो समझा जाएगा कि आरोप बेबुनियाद है. आयोग ने कहा कि वह हर मतदाता के साथ चट्टान की तरह खड़ा है. अगर आरोप लगता है तो सबूत चाहिए. 

    चुनाव आयोग ने भी किया है पलटवार 
     
    उन्होंने यह भी कहा कि वोट चोरी जैसे शब्द संविधान का अपमान नहीं तो क्या है? आयोग ने कहा कि उसके कंधों पर बंदूक रखकर राजनीति की जा रही है. राहुल गाँधी का आरोप है कि आयोग भाजपा के साथ मिलकर "चुनाव चोरी" कर रहा है. विधानसभा और लोकसभा चुनाव चुराए जा रहे है. राहुल गांधी ने यह प्रश्न भी खड़ा किया है कि मेरी प्रेस कांफ्रेंस के बाद मुझसे हलफनामा मांगा गया. भाजपा नेताओं ने भी ऐसा आरोप लगाए, तो क्या उनसे कोई हलफनामा मांगा गया? यह बात तो सच है कि चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच ऐसी सीधी लड़ाई पहले कभी नहीं देखी गई थी. यह बात जरूर है कि चुनाव आयोग के निष्पक्षता पर सवाल ज़रूर उठाए गए थे, लेकिन अभी जो आरोप- प्रत्यारोप का सिलसिला चल निकला है, उसे लोग लोकतंत्र के लिए सही नहीं मानते है. 

    विपक्ष चुनाव आयोग पर "वोट चोरी" के आरोप लगा रहा
     
    विपक्ष चुनाव आयोग पर "वोट चोरी" के आरोप लगा रहा है, तो चुनाव आयोग का कहना है कि यह आरोप निराधार है और इससे संस्था की विश्वसनीय को नुकसान पहुंचता है. यह विवाद हाल के कुछ महीनो  में और अधिक बढ़ गया है. दरअसल, इसकी शुरुआत महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद ही  हो गई थी. राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि चुनाव में फर्जी मतदाताओं को जोड़कर और वोटिंग परसेंटेज बढ़ाकर गड़बड़ी की गई है. उनका यह भी आरोप  था कि कुछ विशेष सीटों पर यह सब किया गया है. आरोप लगाए गए थे कि 2024 के लोकसभा चुनाव और 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बीच वोटर लिस्ट में अचानक 8 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हो गई थी. यह बढ़ोतरी केवल 5 महीने में हुई बताया गया था. 

    सीसीटीवी रिकॉर्डिंग 45 दिनों तक रखने का फैसला सही-आयोग 
     
    चुनाव आयोग ने सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को एक साल के बजाय 45 दिनों तक रखने के फैसले को भी सही बताया है. इधर, बिहार में एसआईआर के बाद 65  लाख वोटरों के नाम हटा दिए गए है. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव आयोग को हटाए गए लोगों के लिस्ट जारी करने है. बिहार में गठबंधन की यह यात्रा सासाराम से औरंगाबाद होते हुए यात्रा गया जी पहुचेंगी. गयाजी  के बाद यात्रा नवादा, नालंदा, शेखपुरा, जमुई से गुजरते हुए लखीसराय, मुंगेर होते हुए भागलपुर पहुचेंगी. भागलपुर से कटिहार, पूर्णिया, अररिया, सुपौल, मधुबनी, दरभंगा से मुजफ्फरपुर होकर आगे जाएगी. मुजफ्फरपुर से सीतामढ़ी, मोतिहारी, पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सिवान, छपरा होते हुए आरा पहुचेंगी. आरा  के बाद यात्रा का अंतिम पड़ाव पटना में होगा.

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो 


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