कभी हड़िया बेचकर जिंदगी की गाड़ी खींचती थी, आज डेयरी का कारोबार कर खुद लिख डाली अपनी किस्मत

    कभी हड़िया बेचकर जिंदगी की गाड़ी खींचती थी, आज डेयरी का कारोबार कर खुद लिख डाली अपनी किस्मत

    गुमला:- जिंदगी एक मुश्किलों की डगर है, जहां पग-पग पर चुनौतियां और इम्तहान इंतजार करती है. हालांकि, जिसके हौंसले बुलंद हो और कुछ कर गुजरने का जज्बा और जूनुन सवार हो तो रास्ते में आई हर तकलीफ भी छू मंतर हो जाती है. झारखंड के गुमला जिले की गरीब महिलाएं भी कुछ ऐसी ही सफलता की इबारत लिख रही है. जिनकी कहानी कईयों को जिंदगी में आगे बढ़ने की एक लौ जालाएगी जिसकी रोशनी से अपनी तकदीर लिख सकेंगे.

    कभी हड़िया बेचती थी महिलाएं

    गुमला जिले के बसिया प्रखंड की बाम्बियारी डीपाटोली की महिलाएं कभी गुजर-बसर के लिए हड़िया बेचती थी. जिसकी कमाई से ही उनका घर-परिवार चलता था. लेकिन, इस पेशे में न तो इज्जत थी औऱ न ही उतना पैसा. जिससे खुशगवार जिंदगी जिया जा सके. हालांकि, इस इलाके में उग्रवाद की जड़े भी गहरी थी, लिहाजा जिंदगी का हर दिन कठीन परीक्षा से गुजरना पड़ता था. लेकिन, एक कहावत है, यहां चरितार्थ होती है कि, जहां चाह है वही राह है.बस एक कदम आगे बढ़ाने की जरुरत है. इन महिलाओं ने घर की दहलिज लांघकर खुद को आत्मनिर्भर करने की ठानी और डेयरी का कारोबार करने का मन बनाया. करीब 30 महिलाओं ने मिलकर दूध उत्पादक समूह का गठन कर बिना सरकारी मदद लिए मिनी डेयरी का काम शुरु किया. आगाज तो फीका रहा, लेकिन मेहनत औऱ लगन ने इसकी चमक बिखेर दी, उनका कारोबार वक्त के साथ फलता-फूलता गया.

    कर्ज लेकर शुरु किया काम 

    महिलाओं ने डेढ़-डेढ़ लाख रुपए का कर्ज सीआईएफ फंड से बैंक के माध्यम से लिया. इसके बाद होलस्टीन फ्रिजयीन नस्ल की 30 गायों से डेयरी की शुरुआत की. रोजाना कम से कम 300 लीटर दूध का उत्पादन होता है. रांची की मशहूर मेधा डेयरी के प्रतिनिथि भी इसे लेने आते है. 40 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से महिलाएं दूध बेचती है. लिहाजा, उनके इस मिनी डेयरी के लिए बाजार खोजने में दिक्कत नहीं हुई.

    कारोबार को विस्तार देने की योजना

    बाम्बियारी डीपाटोली की महिलाओं ने अपने पैरों पर खुद खड़ा होकर जमाने के लिए आदर्श साबित हो रही है. हालांकि, ये महिलाएं इतने से ही नहीं रुकना चाहती, बल्कि डेयरी के कारोबार को आगे बढ़ाना चाहती है. दूध के साथ-साथ अब पनीर, दही, घी की पैकेजिंग कर बेचने की योजना है. इसके अलावा गोबर से केचुआं खाद के साथ-साथ गोबर गैस प्लांट बनाने का भी प्लान किया गया है. आगे महिलाएं बसिया प्रखंड को एक मॉडल बनाना चाहती है.

    रोजगार से जोड़ने की कवायद

    डेयरी के जरिए लोगों को नई राह दिखाने वाली औऱ प्रेरणा देने वाली महिलाओं का मकसद लोगों दूध के कारोबार से जोड़ने की भी है. इनकी योजना खासकर उन महिलाओं को लेकर है. जो शराब बेचकर अपना पेट पालती है. इन मजबूर महिलाओं को डेयरी के काम में लगाने की है. हालांकि, कई महिलाओं ने इसके लिए तत्पर और रजामंदी भी जताई है.

    इन महिलाओं ने जिस तरह से घर की दहलिज को लांघकर खुद अपने पैरों पर खड़ा हुई है. इससे ये साबित होता है कि इंसान कुछ भी कर सकता है. बस कुछ कर गुजरने का जोश होना चाहिए.


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