एक बार फिर से लोबिन के निशाने पर सीएम हेमंत, कहा पार्टी से निकालोगे, लेकिन माटी से कौन निकालेगा? 

    एक बार फिर से लोबिन के निशाने पर सीएम हेमंत, कहा पार्टी से निकालोगे, लेकिन माटी से कौन निकालेगा?

    दुमका(DUMKA): झारखंड बचाओ मोर्चा के बैनर तले दुमका के एसपी कॉलेज ग्राउंड में आदिवासियों के फायर ब्रांड नेता लोबिन हेम्ब्रम ने एक बार फिर से हेमंत सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किये हैं. लोबिन ने कहा कि हम कोई नई मांग तो नहीं कर रहें, हमारी एक-एक मांग वही है, जिसकी घोषणा झामुमो के घोषणा पत्र में की गयी है.

    मुझे पार्टी से निकाला जा सकता है, लेकिन माटी से नहीं

    हेमंत सोरेन पर तंज कसते हुए लोबिन हेम्ब्रम ने कहा कि लोग हमें कहते हैं कि यदि यही हालात रहे तो एक दिन पार्टी से निकाल दिये जाओगे, अब उनको कौन समझाए कि मुझे पार्टी से निकाला जा सकता है, लेकिन माटी से नहीं.

    30 जनवरी को उलिहातू और 2 फरवरी को भोगनाडीह में उपवास कार्यक्रम का एलान 

    सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए लोबिन ने  30 जनवरी को उलिहातू और दो फरवरी को भोगनाडीह में उपवास कार्यक्रम का एलान किया है. लोबिन ने कहा 24 फऱवरी को पूरा झारखंड बंद रहेगा. लोबिन ने कहा कि यह कैसी सरकार, जहां छात्रों के लिए कुक-रसोइया की मांग को पार्टी विरोधी गतिविधि मान लिया जाता है.  

    लोबिन की हर कोशिश यह सिद्ध करने की होती है कि वह सरकार और खास कर हेमंत सोरेन से अधिक आदिवासी हितैषी है. उनके दिल में हेमंत सोरेन और झामुमो से अधिक आदिवासी मूलवासियों के प्रति सहानुभूति है. कहा जा सकता है कि जो काम झारखंड में  विपक्ष को करना चाहिए था, विपक्ष की जिम्मेदारी का पूरी गंभीरता से निर्वहन लोबिन हेम्ब्रम कर रहें हैं.

    यहां बता दें कि दो फरवरी को प्रति वर्ष दुमका में झारखंड दिवस का आयोजन किया  जाता है, लेकिन इस बार आदिवासियों के इस फायर ब्रांड नेता ने इस कार्यक्रम से दूर रहने की घोषणा की है. इस संबंध में पत्रकारों ने उनसे सवाल किया तो लोबिन ने कहा कि जब जनता का काम ही नहीं हो रहा तो तब कार्यक्रम में शामिल होने का औचित्य क्या है. हम ऐसे किसी कार्यक्रम का हिस्सा बने ही क्यों?

    हेमंत सोरेन का स्थायी विपक्ष लोबिन हेम्ब्रम 

    यहां बता दें कि हेमंत सरकार के गठन के बाद से ही लोबिन हेम्ब्रम का स्वर काफी तीखा रहा है, वह सरकार को घेरने का कोई भी मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहते. लोबिन की हर कोशिश यह सिद्ध करने की होती है कि वह सरकार और खास कर हेमंत सोरेन से अधिक आदिवासी हितैषी है. उनके दिल में हेमंत सोरेन और झामुमो से अधिक आदिवासी मूलवासियों के प्रति सहानुभूती है. कहा जा सकता है कि जो काम झारखंड में  विपक्ष को करना चाहिए था, विपक्ष की जिम्मेदारी का पूरी गंभीरता से निर्वहन लोबिन हेम्ब्रम कर रहें हैं.

    रिपोर्ट: देवेन्द्र कुमार


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