ट्रैफिक कंट्रोल के लिए फिर शुरू हुआ पुराना रूट चार्ट, जानिए क्या-क्या होगा बदलाव


धनबाद(DHANBAD): शहर में ट्रैफिक रूट चार्ट को लेकर लगातार प्रयोग किए जा रहे हैं, लेकिन इन प्रयोगों का बहुत ज्यादा फलाफल दिखता नहीं. शनिवार को शहर के लिए फिर नई ट्रैफिक व्यवस्था की घोषणा हुई. पहले जो ट्रैफिक व्यवस्था थी उसी को फिर से लागू किया गया है. यह बात अलग है कि सड़क सुरक्षा सप्ताह में यह बात उठी थी कि पुरानी व्यवस्था ही ठीक थी. शहर को जाम से बहुत राहत थी लेकिन बस एसोसिएशन के दबाव में और व्यापारियों की परेशानी को देखते हुए छूट दी गई थी, लेकिन यह छूट शहर के लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गई. इसलिए नई व्यवस्था लागू की गई है.
अब शहर के बाहर ही रुकेंगी यात्री बस, जानिए नई व्यवस्था में क्या है बसों ट्रकों का रूट
नई व्यवस्था के तहत श्रमिक चौक से बैंक मोड़ की ओर सुबह 8:00 बजे से रात 10:00 बजे तक यात्री बसों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है. इसी तरह शहरी क्षेत्र में मालवाहक के प्रवेश पर 24 घंटे का प्रतिबंध लगा दिया गया है. शहरी क्षेत्र में मालवाहक वाहन 407, 409, 709 एवं अन्य मालवाहक व भारी वाहनों के प्रवेश पर 24 घंटे प्रबंध रहेगी. इसके लिए गोल बिल्डिंग, मेमको मोड़, कतरास मोड़, कर केंद मोड़ एवं धनसार चौक पर नो एंट्री प्वाइंट बनाए गए हैं, हालांकि शहरी क्षेत्रों में स्थित प्रतिष्ठान दुकान व आवासीय क्षेत्रों में प्रयोग के लिए 407, 409, 709 एवं अन्य भारी वाहनों से माल खाली करने के लिए रात 10:00 बजे से सुबह 8:00 बजे तक का समय निर्धारित किया गया है. बस अब शहर से बाहर बाहर ही आया जाया करेंगी. आपको बता दें कि पिछले एक सप्ताह से इस पर मंथन चल रहा था कि रूट चार्ट की रूपरेखा क्या हो.
बस यूनियन और ऑटो यूनियन लगा रहे एक दूसरे पर आरोप
बस मालिक एवं ऑटो वाले भी एक दूसरे पर आरोप लगा रहे थे. बस मालिकों का कहना था कि ऑटो के कारण शहर जाम होता है जबकि ऑटो वालों का कहना था कि रेलवे स्टेशन के बगल में बसों को आने से जाम की स्थिति पैदा होती है. ऑटो वाले यह भी कह रहे थे कि किसी भी रेलवे स्टेशन के बगल में बस पड़ाव नहीं है, यह सिर्फ धनबाद में ही है, जबकि बस मालिकों का कहना था कि उन्हें सिर्फ 5 मिनट की अनुमति है और वह इसका पूरी तरह से पालन करते हैं. ऑटो वाले आड़े तिरछे वाहन लगाकर सड़क जाम कर देते हैं. बाहर हाल नए रूट चार्ट से इस विवाद का निपटारा तो हो गया है लेकिन देखना होगा कि इसे कितनी कड़ाई से लागू किया जाता है और लोगों को जाम से कितना छुटकारा मिल पाता है.
रिपोर्ट: सत्य भूषण सिंह, धनबाद
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