राज्य के सरकारी अस्पतालों में एक वर्ष तक नर्सिंग छात्राओं को करनी होगी नौकरी, पढ़ें पूरी खबर

    राज्य के सरकारी अस्पतालों में एक वर्ष तक नर्सिंग छात्राओं को करनी होगी नौकरी, पढ़ें पूरी खबर

    रांची (RANCHI) झारखंड में सरकारी कॉलेजों से नर्सिंग की पढ़ाई करने वाले छात्राओं को 1 वर्ष तक राज्य के सरकारी अस्पतालों में नौकरी करना अनिवार्य होगा.इसके लिए नर्सों  को बॉन्ड भी भरना होगा. एडमिशन के वक्त ही छात्राओं को शपथ पत्र देना होगा कि वह कोर्स खत्म होने के बाद दस हज़ार रूपए  प्रति महीने जीएनएम को 12 हज़ार के मानदेय पर 1 वर्ष सरकारी अस्पतालों में सेवा देंगे. इसका उल्लंघन करने पर एक लाख रूपए जुर्माना वसूला जाएगा. 1 वर्ष की सेवा करने के बाद नर्सों को अनुभव प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा. इसके आधार पर झारखंड में होने वाली एएनएम जीएनएम की नियमित नियुक्ति में उन्हें 2 अंकों का वेटेज मिलेगा. इसके लिए  नर्सिंग नियुक्ति नियुक्ति नियमावली में प्रावधान किया जाएगा. यह व्यवस्था इसी सेशन से भी लागू किया जाएगा.

    एडमिशन के वक्त भरना होगा बॉन्ड, उल्लंघन पर एक लाख का भरना होगा जुर्माना 

    बॉन्ड आधारित  यह व्यवस्था वर्तमान सत्र  से ही लागू किया जाएगा. अभी एएनएम जीएनएम ट्रेनिंग स्कूल में पढ़ रही छात्राओं का बॉन्ड  का विकल्प दिया जाएगा. विकल्प देने के बाद इसका पालन करना जरूरी होगा जो इस व्यवस्था को चुनेंगी. उन  नर्सों पर खर्च होने वाली राशि का भार संबंधित जिले के सिविल सर्जन को अनुबंध और मानदेय कर्मियों के भुगतान के लिए मिलने वाली राशि से किया जाएगा.  राज्य के सभी सिविल सर्जनों का दायित्व होगा कि वह नर्सों से बांड आधारित सेवा लें और इसकी सूचना स्वास्थ्य सेवाओं के डायरेक्टर प्रमुख और क्षेत्रीय उपनिदेशक को दें.

    पीजी डॉक्टर कर रहे तीन वर्षों की अनिवार्य सेवा

    राज्य में वर्तमान में मेडिकल पीजी की परीक्षा पास करने वाले छात्र-छात्राओं से राज्य में 3 वर्ष की अनिवार्य सेवा ली जा रही है. इसके लिए छात्र छात्राओं से बॉन्ड भरवाया गया है उनका उल्लंघन करने वालों से  20 लाख रुपए हर्जाना लिए जाने का भी प्रावधान है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं को अब 3 वर्ष तक अनिवार्य रूप से राज्य में सेवा देने के लिए भी प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया था, हालांकि अभी इसे  लागू नहीं किया गया है. राज्य में डॉक्टरों के 58% नर्सों की 87% और पैरामेडिकल स्टाफ 76% सीटें खाली हैं.


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