अब होगी सख्ती: अगर बच्चों को बेचा तम्बाकू उत्पाद तो एक लाख जुर्माना और होगी 7 साल की जेल

    अब होगी सख्ती: अगर बच्चों को बेचा तम्बाकू उत्पाद तो एक लाख जुर्माना और होगी 7 साल की जेल

    धनबाद(DHANBAD) | जिले के सभी शिक्षण संस्थानों को तम्बाकू मुक्त बनाने तथा तम्बाकू मुक्त युवा अभियान 2.0 के लिए बुधवार को  स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखण्ड सरकार द्वारा सोशियो इकोनॉमिक एण्ड एजुकेशनल डेवलॉपमेंट सोसाईटी (सीड्स) के तकनीकी सहयोग से  एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में अतिरिक्त जिला कार्यक्रम पदाधिकारी  आशीष कुमार ने  कहा कि तम्बाकू सेवन की आदत जनस्वास्थ्य के लिए एक बड़ी समस्या के रुप में वैश्विक स्तर पर उभर रही है. इसलिए तंबाकू सेवन के दुष्परिणाम के प्रति अवयस्क और युवा वर्ग में जागरूकता फैलाना आवश्यक है.  

    तम्बाकू के दुष्परिणाम को बताना हो गया है जरुरी 

    उन्होंने कहा कि हम सब की जिम्मेदारी है कि अपने आनेवाले भविष्य की चिंता करते हुए युवाओं और अवयस्कों को तम्बाकू की लत से दूर रखा जाए.  उन्होंने बताया कि स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखण्ड सरकार के मार्गदर्शन में सोशियो इकोनॉमिक एण्ड एजुकेशनल डेवलपमेंट सोसायटी (सीड्स) झारखण्ड द्वारा “तम्बाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान के दिशा-निर्देशों के अनुरूप क्रियान्वयन के लिए  साकारात्मक प्रयास किये जा रहे है. उन्होंने सभी प्रतिभागियों को तम्बाकू सेवन न करने की शपथ दिलाई. सीडस के कार्यक्रम समन्वयक  रिम्पल झा ने तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम की आवश्यकता के बारे में विस्तार पूर्वक चर्चा करते हुए बताया कि तम्बाकू उत्पाद से बच्चे, अवस्क एवं युवा वर्ग को बचाये जाने की आवश्यकता है.  ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे (2019) द्वारा सम्पूर्ण विश्व में युवाओं द्वारा तम्बाकू सेवन से संबंधित जो आंकड़ें संकलित किये गये हैं, वह दर्शाता है कि भारत में 13-15 वर्ष के 8.5 प्रतिशत छात्र किसी न किसी प्रकार के तम्बाकू का उपयोग कर रहे है. 

    झारखंड के 5.1 प्रतिशत छात्र  करते है तम्बाकू का सेवन 

     वहीं झारखण्ड मे यह 5.1 प्रतिशत है, जो चिन्ता का विषय है. उन्होंने  कहा कि तम्बाकू सेवन से हर साल देश में लगभग 13 लाख लोगों की मौत हो रही है.  तम्बाकू सेवन से खास तौर पर बच्चों, अवयस्कों एवं युवा वर्ग को बचाये जाने की आवश्यकता है. उन्होने कहा प्रायः ऐसा देखा जाता है कि राज्य के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के आस-पास तम्बाकू उत्पाद जैसे कि सिगरेट, बीडी़ पान मसाला, जर्दा एवं खैनी इत्यादि की बिक्री की जाती है.  इससे कम आयु के युवाओं एवं छात्रों में धूम्रपान एवं तम्बाकू सेवन की व्यसन को बढ़ावा मिलता है.  “तम्बाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नो  गतिविधियां की जानी है.

    सभी शिक्षण संस्थानों  को यह सब होंगे करने 

     जिसमें सभी शिक्षण संस्थानों में धूम्रपान मुक्त एवं तंबाकू मुक्त परिसर का साइनेज का प्रदर्शन एवं नामित किए गए पदाधिकारी का नाम, पदनाम एवं मोबाइल नंबर अंकित होना, तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान का साइनेज शिक्षण संस्थान के मुख्य द्वार पर लगाना, तम्बाकू सेवन के दूष्परिणामों से संबंधित पोस्टर का प्रदर्शन, हर छः माह पर तम्बाकू नियंत्रण से संबंधित गतिविधियों का आयोजन करना, तम्बाकू मोनिटर शिक्षक एवं विद्यार्थि नामित करना एवं उनका नाम पदनाम एवं मोबाईल नम्बर को साइनेज पर प्रदर्शित करना, तम्बाकू मुक्त विद्यालय हेतु आचार संहिता विकसित किया जाना, स्कूल के बाहरी दीवारों से 100 गज के दायरे को पीली रेखा से रेखांकित कर तम्बाकू मुक्त क्षेत्र घोषित करना तथा स्कूल के बाहरी दीवारों से 100 गज के दायरे में अवस्थित दुकानों  में किसी प्रकार के तम्बाकू उत्पादों की बिक्री न होना सुनिश्चित किया जाना शामिल है. उन्होंने तम्बाकू मुक्त पीढ़ी एवं तम्बाकू मुक्त गांव बनाए जाने की पूर्ण जानकारी दी. कार्यक्रम में सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी  अशोक कुमार पाण्डेय, शिक्षा विभाग के सभी जिला स्तरीय पदाधिकारी, सभी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, चयनित विद्यालय के प्राचार्य, नोडल शिक्षक, सीड्स झारखंड के क्षेत्रीय समन्वयक  भोला पाण्डेय सहित अन्य लोग उपस्थित थे. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 

     


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