अब जाकर मिली है डीएसआर को मंजूरी ,इधर बालू से बेधडक तेल कैसे निकाल रहे है माफिया ,जानिए पूरी खबर


धनबाद(DHANBAD): धनबाद जिले में बालू उठाव पर अभी भी रोक है. अभी तक किसी भी बालू घाट के लिए किसी ठेकेदार को टेंडर नहीं मिला है. धनबाद की सब डिविजनल कमेटी ने बालू घाटों की डीएसआर(जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट) को मंजूरी देते हुए शुक्रवार को राज्य स्तरीय विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति को भेज दी है. अब स्वीकृति मिलने के बाद ही घाटों की नीलामी प्रक्रिया शुरू हो सकती है. धनबाद में कैटेगरी वन में 16 एवं कैटेगरी टू में 17 बालू घाटों की रिपोर्ट को सब डिविजनल कमेटी ने स्वीकृति दी है. सुप्रीम कोर्ट एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण( एनजीटी) के निर्देश पर जारी गाइडलाइन के आधार पर डीएसआर रिपोर्ट बनानी थी. इसके लिए धनबाद में कंसलटेंसी का चयन किया गया था. कंसल्टेंसी की ओर से बालू घाटों के लिए तैयार डीएसआर रिपोर्ट को सब डिविजनल कमेटी की ओर से स्वीकृति दे दी गई है. सूत्रों के अनुसार धनबाद के उपायुक्त की अध्यक्षता में शुक्रवार को बैठक हुई, उस बैठक के निर्णय के बाद राज्य स्तरीय विशेषज्ञ समिति को भेज दिया गया है. इस रिपोर्ट में जिले में बालू की उपलब्धता एवं गुणवत्ता की भी जानकारी दी गई है.
धनबाद में यह धंधा कभी नहीं होता मंदा
इधर, धनबाद में बालू उठाव पर रोक के बावजूद बालू का धड़ल्ले से उठाव हो रहा है. इस काम में दबंग किस्म के लोग लगे हुए हैं. इसके एवज में तमाम एजेंसियां लाभान्वित हो रही है. स्थानीय लोगों को तो केवल मजदूरी भर का पैसा मिलता है. सूत्र बताते हैं कि बालू के अवैध धंधे में धनबाद के लगभग एक दर्जन से अधिक दबंग लोग शामिल है. इनमें से हर कोई किसी न किसी पॉलिटिकल पार्टी से जुड़ा हुआ है. इस काम में पहले ग्रामीणों को लगाया जाता है, वह नदी से बालू निकालकर घाट तक पहुंचाते हैं, वहां से बालू ट्रैक्टर अथवा हाईवा से विभिन्न इलाकों में भेजा जाता है. छोटी गाड़ियो का भी खूब इस्तेमाल होता है. संबंधित गाड़ी का नंबर पुलिस को दे दिया जाता है. नंबर ही वाहनों का पासिंग कार्ड है. जितनी गाड़ियां जाती है, उसके हिसाब से संबंधित एजेंसियों को पैसा पहुंचा दिया जाता है. हाईलाइट होने के बाद छापेमारी की जाती है, लेकिन यह सब सूचना पहले ही लीक जाती है. इसलिए स्थल पर छापामार दल को कुछ मिलता नहीं है.
छापेमारी की सूचना पहले ही हो जाती है लीक
अगर बाहर से कोई टीम आने वाली होती है तो इसकी सूचना माफिया तक पहुंच जाती है और उसके बाद सब कुछ सामान्य ढंग से होता है. लोग बताते हैं कि टुंडी में बालू माफियाओं की करतूत से बराकर नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है. नदी में रेत की जगह मिट्टी और बड़े-बड़े पत्थर नजर आने लगे हैं. पहले बालू से भरी रहने वाली बराकर नदी के किसी भी घाट से बालू उठाया जा सकता था, पर आज स्थिति यह है कि टुंडी प्रखंड में बराकर नदी के किसी भी घाट पर बालू नहीं है. नदी में जहां तक ट्रैक्टर जा सकता है, वहां से भी बालू का उठाव किया जा रहा है. अब हालत यह है कि रेत माफियाओं ने बराकर नदी की दूसरी ओर और बीच में से बालू उठाने के लिए कई ड्रमों को बांधकर नाव बना लिया है. इस जुगाड़ तंत्र पर थोड़ा-थोड़ा बालू लाया जाता है और उसे किनारे जमा किया जाता है. कोयला की तरह यहां बालू माफिया भी सक्रिय है. बालू पर रोक के बावजूद किसी का कोई काम रुकता नहीं है. यह बात अलग है कि बालू की दर अधिक होती है, लेकिन खरीदने वाले लाचारी में ही सही, बालू इन माफिया तंत्र से खरीदते हैं. खरीददार को तो नुकसान होता ही है, सरकार को भी राजस्व की हानि होती है.
रिपोर्ट: सत्यभूषण सिंह, धनबाद
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