झरिया में केवल कोयले की ही नहीं ,सरकारी चावल की भी होती है तस्करी ,जानिए कैसे

    झरिया में केवल कोयले की ही नहीं ,सरकारी चावल की भी होती है तस्करी ,जानिए कैसे

    धनबाद(DHANBAD): झरिया में केवल कोयले की ही नहीं, चावल  की  भी खूब तस्करी हो रही है. गरीबों को ₹1 किलो मिलने वाला चावल तस्करों के पास पहुंच जा रहा है.  इस धंधे में लगे लोग  चावल खरीदने की दर तय किए हुए है.  शहरी इलाके में ₹15 किलो तक चावल खरीद रहे हैं जबकि कोलियरी इलाकों में ₹8 प्रति किलो के हिसाब से सरकारी चावल की खरीद हो रही है.  गरीबों से चावल खरीदने वालों का एक संगठित गिरोह सक्रिय ही. जो कोयला चोरों की तरह अपना भी इलाका बांट कर रखे हुए है.  चावल खरीदने वाले एक गिरोह  दूसरे  के कार्य क्षेत्र में प्रवेश नहीं करते. 

    पूरी शांति से चलता है यह धंधा 
     
    इसलिए यह धंधा बहुत शांति से चल रहा है.  कभी कभार  विवाद होने पर ही पुलिस को सूचना मिलती है और उसके बाद छापामारी की जाती है.  झरिया के कई इलाके ऐसे हैं, जहां चावल खरीदने  वाले अपने गोदाम बना रखे है.  यह काम सिर्फ झरिया ही में ही नहीं धनबाद जिले के अन्य इलाकों में भी निर्बाध चल रहा है.  जिले में सक्रिय कई गैंग ₹1 चावल को अपना व्यवसाय का अंग बना लिए है. इस चावल को बड़े-बड़े वाहनों से  बंगाल भेज दिया जाता है, जहां इन चावल  में फिर से पॉलिश वगैरह करके नए ढंग से चावल बाजार में उतारा जाता है, जिसकी कीमत 40 से ₹50 के बीच होती है. 



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