निरसा का बर बेंदिया पुल, 2007 में शुरू हुआ था काम लेकिन अब तक है अधूरा, जानिए पुल बन जाने से क्या होंगे फायदे


धनबाद (DHABAD) : मार्च 2022 में बराकर नदी में नाव डूब गई थी. उसमें कम से कम आधा दर्जन लोग जल समाधि ले लिए थे. बावजूद पुल नहीं बना और लोग अभी भी नाव से आना जाना कर रहे हैं. निरसा होकर बहने वाली बराकर नदी पर बरबेंदिया पुल का निर्माण 14 साल बाद भी पूरा नहीं हुआ है. यह पुल बन जाने के बाद संथाल परगना सीधे धनबाद से जुड़ जाएगा. पुल बनाने की कई बार पहल हुई लेकिन काम पूरा नहीं हुआ. 2007 में करीब 3.5 किलोमीटर लंबे पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था. उस समय 55 करोड़ ऐस्टीमेटेड कॉस्ट था. निर्माण के दौरान ही भारी बारिश के कारण 2008 में पुल के चार पिलर बाहर गए. यह भ्रष्टाचार का मुद्दा बन गया था और उस समय खूब हल्ला हुआ, जिस समय पिलर टूटा था उस समय फिलहाल निरसा की विधायक अपर्णा सेनगुप्ता झारखंड में मंत्री थी.
विधानसभा में उठे सवाल
विधानसभा में इसको लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, लेकिन पुल के निर्माण के प्रति न सरकार को रूचि है और ना जनप्रतिनिधियों को. बता दें कि पुल बन जाने से झारखंड के 8 जिले सीधे तौर पर एक दूसरे से जुड़ जाएंगे. निरसा से जामताड़ा की दूरी चितरंजन होते हुए करीब 65 किलोमीटर कम हो जाएगी. इसके अलावा धनबाद ,बोकारो, गिरिडीह एवं संथाल परगना का जामताड़ा, देवघर, दुमका सीधे जुड़ जाएंगे.इस वजह से बड़ी सहूलियत होगी लेकिन पता नहीं किन कारणों से अभी भी यह कामअधूरा है. कहा जा सकता है कि जनप्रतिनिधियों के दबाव नहीं डालने के कारण सरकार भी इस ओर ध्यान नहीं देती. नतीजा है कि पैसे की बर्बादी तो हो ही रही है साथ ही साथ लोगों को परेशानी भी उठानी पड़ रही है. जान जोखिम में डालकर लोग नदी पार करते हैं, नदी में जो नाव चलती हैं, उनकी भी कभी जांच-पड़ताल नहीं होती कि वह नाव चलने लायक है अथवा नहीं.
रिपोर्ट: सत्यभूषण सिंह, धनबाद
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