"बॉयलर" बनी धरती में गिरे को तलाश रही NDRF, झरिया की धरती में जो चला जाता जीवित नहीं बचता

    "बॉयलर" बनी धरती में गिरे को तलाश रही NDRF, झरिया की धरती में जो चला जाता जीवित नहीं बचता

    धनबाद(DHANBAD): झरिया की धरती "बॉयलर" बन गई है.  अगर कोई गलती से भी गिर गया तो हड्डियों का भी पता नहीं चलेगा.  शुक्रवार को झरिया के घनुडीह  के गांधी चबूतरा के पास बने एक गोफ में  एक व्यक्ति गिर गया.  उसके बाद तो इलाके में हलचल मच गई.  पुलिस भी पहुंची, बीसीसीएल की रेस्क्यू टीम भी पहुंची लेकिन बचाव कार्य शुरू करने का हिम्मत नहीं जुटा पाई. 

    लोकल टीम को झांकने की भी हिम्मत नहीं हुई 
     
    नतीजा हुआ कि शनिवार की सुबह पटना से एनडीआरएफ की टीम पहुंची.  उसके बाद बचाव कार्य शुरू किया गया है.  परिवार वालों ने कपड़ा देखकर गिरने वाले की पहचान परमेश्वर चौहान के रूप में की है.  दो-तीन दिनों से वह उस इलाके में देखा जा रहा था.  गोफ  जमीन से 20 फीट नीचे तक है.  वहां से भारी दुर्गंध आ रही है.  पूरा इलाका अग्नि प्रभावित क्षेत्र है.  इस वजह से भी लोकल रेस्क्यू टीम कुछ करने की हिम्मत नहीं हुई.  अब देखना है कि एनडीआरएफ की टीम को  क्या परिणाम हाथ लगता है.  वैसे झरिया की भूमिगत आग  1995 से अब तक कई जानें  ले चुकी है. 

    1995 से अब तक ले चुकी है कई जानें 
     
    1995 में झरिया के  चौथाई कुल्ही  की युवती  पानी भरने जाने के दौरान जमींदोज हो गई थी.  24 मई 2017 को इंदिरा चौक के पास बबलू खान और उनका बेटा रहीम जमीन में समा गए थे.  2006 में शिमला बहाल के  एक घर में खाना खा रही  युवती की मौत   जमीन में समा जाने से हो गई थी.  2020 के जनवरी महीने में इंडस्ट्रीज कोलियरी  के दिलीप बावरी की पत्नी शौच के लिए जाने के क्रम में जमींदोज हो गई थी.  18 फरवरी 20 22 को झरिया के मोहरी बांध में 10 वर्षीय शशी कुमार गोफ  में गिरकर झुलस गया था.  हालात यह हो गए हैं कि अग्नि प्रभावित क्षेत्र में रहने वाले लोगो के बारे में वह खुद भी नहीं जानते कि   कब उनके जीवन की शाम आ जाए.  बहरहाल अग्नि प्रभावित क्षेत्र के लोगों को पुनर्वास काम में अगर तेजी नहीं लाई गई तो और भी जाने जा सकती है. 

    धनबाद से संतोष की रिपोर्ट



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