गिरिडीह(GIRIDIH): झारखंड में नक्सलवाद पर काफी हद तक काबू पाया जा चुका है, लेकिन एक नाम अब भी पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है कुख्यात नक्सली मिसिर बेसरा. इस पर सरकार ने एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा है. बावजूद इसके, अब तक उसका आत्मसमर्पण न होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है.
इसी सिलसिले में अभियान के तहत एएसपी सुरजीत कुमार, डुमरी एसडीपीओ सुमित कुमार और इंस्पेक्टर राजेंद्र कुमार उसकी तलाश में उसके पैतृक गांव मदनाडीह पहुंचे. यहां अधिकारियों ने उसके परिजनों से मुलाकात कर मिसिर बेसरा को जल्द से जल्द आत्मसमर्पण करने के लिए समझाने की अपील की. साथ ही, उन्हें सरकार की सरेंडर और पुनर्वास नीति के तहत मिलने वाले लाभों की जानकारी भी दी गई.
परिजनों ने अधिकारियों को बताया कि मिसिर बेसरा करीब 40 साल पहले घर छोड़कर चला गया था और तब से अब तक उसकी कोई खबर नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि परिवार की ओर से लगातार उसकी तलाश की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है. हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगर उसका पता चलता है तो वे उसे आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करेंगे.
जानकारी के मुताबिक, मिसिर बेसरा ने 1985-86 के आसपास नक्सल संगठन से जुड़ने के लिए घर छोड़ा था और उसके बाद से वह कभी वापस नहीं लौटा.
सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को आर्थिक सहायता, जमीन आवंटन, आवास निर्माण के लिए राशि, जीवन बीमा और बच्चों की शिक्षा के लिए आर्थिक सहयोग दिया जाता है. इसके अलावा, हथियार के साथ सरेंडर करने पर अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। साथ ही, उन्हें स्वरोजगार और व्यावसायिक प्रशिक्षण के जरिए मुख्यधारा से जोड़ने की भी व्यवस्था है, ताकि उनका और उनके परिवार का जीवन बेहतर हो सके.
रिपोर्ट: दिनेश कुमार
Thenewspost - Jharkhand
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