झारखंड में दरकता नक्सलियों का किला! एक करोड़ के इनामी के बाद 25  लाख का कुख्यात ढ़ेर, जानिए एनकाउटर की पूरी कहानी 

    झारखंड में दरकता नक्सलियों का किला! एक करोड़ के इनामी के बाद 25  लाख का कुख्यात ढ़ेर, जानिए एनकाउटर की पूरी कहानी

    रांची(RANCHI): झारखंड में नक्सली के खिलाफ सुरक्षा बल के जवानों का अभियान तेज है. सारंडा से लेकर पारसनाथ के इलाके में जवान कहर बन कर टूट रहे है. जंगल में खोज कर नक्सलियों को मुहतोड़ जवाब देते दिखे है. अगर बात पारसनाथ के इलाके की करें तो अब माना जा रहा है कि नक्सलियों का किला बस ध्वस्त होने वाला है. पहले एक करोड़ के इनामी प्रयाग मांझी को लुगु पहाड़ी में घेर के मारा और अब 25 लाख के इनामी कुंवर मांझी को जवानों ने काशी टांड़ जंगल के जंगल में ढ़ेर कर दिया है. साथ ही दो नक्सली को गोली लगने की सूचना है, लेकिन 25 लाख का इनामी नक्सली इस इलाके का आतंक माना जाता है.

    सबसे पहले पारसनाथ के आतंक और इलाके में उग्रवाद के जनक मानें जाने वाले प्रयाग मांझी के लिए काल बन कर जवान जंगल में टूटे. और लुगु पहाड़ी में घुस कर एक करोड़ के इनामी प्रयाग मांझी के साथ के उसके दस्ते के 8 नक्सलियों को ढ़ेर कर दिया. इसमें कई कुख्यात नक्सली भी शामिल थे.जो बड़ी वारदात को अंजाम दे चुके थे, लेकिन 21 अप्रैल की सुबह सभी के लिए आखरी सुबह हुई. जवानों को सूचना मिली थी की एक करोड़ के इनामी नक्सली का दस्ता घूम रहा है. इसके बाद सोमवार की सुबह जवान जंगल में सर्च अभियान पर निकले. इसी बीच लुगु पहाड़ी के पास नक्सलियों से सामना हो गया. फिर मुठभेड़ शुरू हुई और जवानो ने मुहतोड़ जवाब दिया. 

    प्रयाग मांझी  सिर्फ झारखंड ही नहीं बल्कि बिहार, छत्तीसगढ़ और ओड़िशा में भी माओवादियों का बड़ा चेहरा था. गिरिडीह का पारसनाथ और बोकारो का लुगू पहाड़ तो उसके नाम से थर-थर कंपता था. सूत्र बताते हैं कि प्रयाग मांझी  भाकपा माओवादी  केंद्रीय कमेटी का सदस्य था. वह संगठन के लिए रणनीति भी बनाता था और हमले की तैयारी भी करता था. फिलहाल वह नक्सली गतिविधियों को संगठित करने में लगा हुआ था. विवेक दा धनबाद जिले के टुंडी के मानियाडीह थाना क्षेत्र का रहने वाला था. बहुत कम उम्र में ही वह संगठन में शामिल हो गया था. 

    लेकिन उसकी सक्रियता सीमित नहीं थी. वह झारखंड के गिरिडीह, बोकारो, लातेहार से लेकर बिहार, बंगाल, ओड़िशा और छत्तीसगढ़ तक फैले नक्सली बेल्ट में बरसों तक सक्रिय रहा. सूत्र बताते हैं कि उसके खिलाफ केवल गिरिडीह में ही 50 से अधिक मामले दर्ज है. माओवादी संगठन में उसकी पहचान एक तेज तर्रार रणनीतिकार के रूप में थी. उसके दस्ते के पास एक-47, इंसास राइफल और कई विस्फोटक मौजूद थे. उसके साथ 50 से अधिक नक्सली थे. महिला माओवादियों का दस्ता भी था. जो अलग-अलग इलाकों में काम करते थे. उसकी तूती कई इलाकों में बोलती थी. 

    इसके बाद अब 16 जुलाई की सुबह इसी लुगु पहाड़ी से सटे काशी टांड़ जंगल में भीषण मुठभेड़ हुई. यहां भी जवानों को नक्सल गतिविधि की जानकारी मिली. जिसके बाद इलाके की घेराबंदी कर अभियान चलाया जा रहा था. इसी बीच जैसे ही जंगल के बीच जवान पहुंचे पहले से घात लगते बैठे नक्सलियों ने गोली चलाना शुरू कर दिया. जिसके बाद जवाबी कार्रवाई जवानों ने शुरू किया. इस मुठभेड़ में एक जवान घायल हो गए हैं. वहीं जवानों ने दो नक्सलियों को ढ़ेर कर दिया. जब जवानों ने शव को देखा तो उसकी पहचान  25 लाख का इनामी कुंवर मांझी के रूप में हुई है.साथ ही इलाके में सर्च अभियान जारी है. रूक-रूक कर मुठभड़ अभी हो रही है.           
                  

         


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