मुस्लिम युवाओं ने लिया दहेज रहित शादी का संकल्प! हैदरनगर से हुआ बड़ा ऐलान   

    मुस्लिम युवाओं ने लिया दहेज रहित शादी का संकल्प! हैदरनगर से हुआ बड़ा ऐलान

    पलामू(PALAMU): इस्लाम में शादी को आसान किया गया है. ताकि किसी गरीब को अपनी बच्ची की शादी के लिए सोचना ना पड़े. लेकिन जैसे जैसे दुनिया आगे बढ़ी यह परंपरा भी कही दूर छूट गई. अब शादियों में लाखों रुपये खर्च होने लगे. बिना जहेज के कोई शादी को तैयार नहीं होते है.ऐसे में अब उलेमा शादी में फैली क्रुतियों को खत्म करने की पहल फिर से शुरू कर दी है.  रविवार को भाई बिगहा में हैदरनगर और मोहम्मदगंज प्रखंड के उलेमा -ए- कराम और  दानिशवरान- ए- इस्लाम की तहरीक-ए-बेदारी व इसलाह- ए- मोआशरा के मौजू पर एक अहम बैठक हुई. बैठक में कुछ फैसले लिए गए है. बैठक में नौ सूत्री प्रस्ताव पारित किया गया.

    यह हुआ निर्णय

    जिसमें मुस्लिम समाज में पूरी तरह शराब पीने पर पाबंदी लगाई गई. निकाह को आसान बनानाने और  रस्मों  रिवाज, फुजूल खर्ची, खास तौर पर जहेज़ पर पाबंदी के साथ मंगनी व हल्दी की रस्म को बंद करने, रतजगा से परहेज़ करने, बारातियों की तादाद की रस्म को खत्म करते हुए ज़्यादा से ज़्यादा पचास (50) लोगों को शामिल करने, मस्जिद में सादगी से सुन्नत के मुताबिक निकाह करने, लड़की की शादी में दावत का एहतमाम बाहरी मेहमान और घर वालों के लिए ही करने, दावत- ए- वलीमा सादगी के साथ दौलत की नुमाईश के बेगैर गरीब व मसाकीन का ख़्याल करते हुए  करने, महफिल- ए- निकाह व दावत- ए- वलीमा में आतिशबाज़ी, डीजे,गाना, बाजा, वीडियोग्राफी और खेल तमाशों से मुकम्मल परहेज़ करने, निकाह के तयशुदा वक़्त की पाबंदी सखती से करना व रात 11 बजे तक बारात लाने का आखरी वक़्त तय करने, जहाँ तक मुमकिन हो सके बारात दिन में बुलाने की कोशिश करना शामिल है.  

    बैठक में सैकड़ों मां बाप ने अपने बच्चों की शादी शादगी के साथ बिना जहेज करने का संकल्प लिया.  वहीं उपस्थित युवाओं ने भी बिना जगह सुन्नत के तरीके से शादी करने का वादा सभी के समक्ष किया.  कमीटी के फैसले को न मानने वालो का सोशल बायकाट करने की बात कही गई.

    अध्यक्षता मुफ्ती सज्जाद सहन ने की.  संचालन  मौलाना अहमद अली खान रजवी ने किया.  मौके पर कारी सलाहुद्दीन अयूबी ,मौलाना महबूब, मौलाना मुनौवर आलम, मौलाना अफरोज, अरशद बनारसी, अबू नसर सिद्दीकी, सज्जू खान, मोजीबुद्दीन खान, जाफर हवारी ,नवाजिश खान, हाजी कलीम सिद्दीकी, हाजी मुख्तार,हाजी नुरुल्लाह सिद्दीकी, अंसार खान, राजू खान, अली असगर खान, शब्बीर अंसारी, शकील खान, इस्तियाक अहमद, अरशद राजा बनारसी आदि सैकड़ों लोग मौजूद थे



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