निगम चुनाव : झारखंड भाजपा को तो आदित्य साहू संभालेंगे लेकिन धनबाद को कैसे संभालेंगी भाजपा !


धनबाद (DHANBAD) : दही- चूड़ा खाने के बाद झारखंड को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल जाएगा. कार्यकर्ता उनकी ताजपोशी देखेंगे. लेकिन इसी के साथ सवाल उठ रहा है कि धनबाद महानगर भाजपा को कौन और कैसे संभालेगा? खासकर निगम चुनाव को लेकर सवाल किये जा रहे हैं कि क्या 2015 का इतिहास इस बार भी दोहराया जाएगा? क्या पूर्व सांसद डॉ रविंद्र राय, पूर्व मंत्री अमर कुमार बाउरी और विधायक राज सिन्हा धनबाद भाजपा में निगम पद के उम्मीदवारों में राय बनवा पाएंगे. यह एक बहुत बड़ा सवाल बनकर सामने आया है. अगर एक राय नहीं बन पाई तो नए प्रदेश अध्यक्ष बनने जा रहे आदित्य साहू के लिए भी यह एक बड़ी चुनौती होगी. आदित्य साहू ही भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष बनेंगे, यह तो बिल्कुल तय है.
इसी महीने चुनाव की अधिसूचना जारी हो सकती है
निगम चुनाव की अधिसूचना इसी महीने जारी हो सकती है. वैसे, धनबाद नगर निगम में उम्मीदवारी को लेकर " गाछे कटहल-ओठे तेल" वाली बात सामने आई है. चुकि सीटिंग मेयर शेखर अग्रवाल भाजपा से ही हैं, ऐसे में यह तो तय है कि वह चुनाव लड़ेंगे ही, चाहे परिस्थितियां जो भी हो. इधर, कई "हैवीवेट" भी निगम चुनाव में अपनी उम्मीदवारी करेंगे, इसमें भी कोई संदेह नहीं है. पूर्व सांसद पशुपतिनाथ सिंह के बेटे भी सोशल मीडिया पर दावा ठोक रहे हैं, तो सांसद ढुल्लू महतो की पत्नी के भी चुनाव लड़ने की चर्चा है. भाजपा से और लोग भी हैं, जो मेयर सीट पर नजर गड़ाए हुए है. झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह हालांकि अभी तक अपना पत्ता नहीं खोले हैं, लेकिन सूत्र बताते हैं कि उनकी भी नजर मेयर की कुर्सी पर लगी हुई है.
भाजपा दलीय आधार पर चुनाव कराने की मांग कर रही है
वैसे तो भाजपा झारखंड में निकाय चुनाव दलीय आधार पर कराने की मांग कर रही है. इसके लिए आंदोलन भी किए गए, लेकिन अब तो लगभग तय माना जा रहा है कि दलीय आधार पर निकाय चुनाव नहीं होंगे. अब तक दलीय आधार पर चुनाव हुए भी नहीं है. लेकिन दल अपने किसी न किसी उम्मीदवार का समर्थन करता आया है. वैसे, यह स्थिति केवल भाजपा में ही नहीं है, कांग्रेस में भी वही बात है. तो झामुमो में भी वही बात है. भाजपा चुकि इस बार दलीय आधार पर चुनाव कराने की बात उठाई है, इसलिए भी भाजपा की चर्चा अधिक है. लेकिन धनबाद की अगर बात की जाए, तो भाजपा में ही ज्यादा मारामारी है और भाजपा से ही अधिक हैवीवेट चुनाव की प्रतीक्षा कर रहे हैं. पहली बार धनबाद मेयर की सीट सामान्य वर्ग के कोट में आई है.
2015 में भी भाजपा में हुए थे कई दिलचस्प खेल
2006 में निगम का गठन होने के बाद 2010 में पहली बार चुनाव हुआ. तो इंदु देवी मेयर चुनी गई. 2015 में मेयर सीट ओबीसी के लिए आरक्षित हुआ, तो शेखर अग्रवाल चुनाव जीते. हालांकि 2015 में भाजपा में भी कम "खेल" नहीं हुआ. उद्योगपति प्रदीप संथालिया भी मेयर पद का चुनाव लड़ रहे थे. भाजपा ने उन्हें पार्टी समर्थित उम्मीदवार बता दिया था, बावजूद भाजपा से जुड़े शेखर अग्रवाल चुनाव में डटे रहे. बाद में कुछ ऐसी स्थिति पैदा हुई कि प्रदीप संथालिया चुनाव मैदान से हट गए. झरिया के भाजपा नेता राजकुमार अग्रवाल ने भी चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा. 2026 के चुनाव में भी ऐसा लग रहा है कि इतिहास दोहराया जाएगा. मेयर की कुर्सी को लेकर धनबाद भाजपा के सारे नियम और कायदे धनबाद में आकर ध्वस्त हो जाएंगे, इसकी पूरी संभावना है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
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