माह -ए-रमजान : अकीदात के साथ अदा की गई पहले जुमे की नमाज़

    माह -ए-रमजान : अकीदात के साथ अदा की गई पहले जुमे की नमाज़

    पलामू(PALAMU): रहमत बरकत और मगफिरत का माह रमजान चल रहा है. गली मुहल्ले की रौनक बढ़ गई है. दिन भर रोजा रखने के बाद रात तराविह की नमाज़ अदा की जा रही है.हर तरफ कुआरन की तिलवात की बुलंद आवाज सुनाई दे रही है. इसी कड़ी आज रमजान मुबारक का पहला जुमा है. सभी मस्जिदों में अकीदात के साथ मुसलमानों ने जुमे की नमाज अदा की है. नमाज पढ़ने के बाद देश दुनिया के साथ अपने आस पास अमन चैन बरकरार रहने की दुआ की गई. शहर के छः महान स्थित जामा मस्जिद, बाजार स्थित चौक बाजार मस्जिद, पहाड़ी मुहल्ला स्थित नूरी मस्जिद, कुंड मुहल्ला स्थित मिल्लत मस्जिद, मुस्लिमनगर स्थित मदीना मस्जिद, अहले हदीस मस्जिद, मोहम्मदिया मस्जिद, शाहपुर स्थित तैबा मस्जिद समेत सभी मस्जिदों में अकीदत के साथ नमाज़-ए-जुमा अदा किया गया.

    इस मौके पर जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती मोहम्मद शाहनवाज़ कासमी ने कहा कि रमज़ान का रोज़ा फ़र्ज़ है.रमजान में सवाब के नियत से रोजा रखता है, अल्लाह ताला उसके पिछले गुनाह माफ कर देते है.रमजान के महीने में सदका और जकात देने वालों के घर में कभी भी किसी चीज की कमी नहीं होती है. रमजान के महीने में अपने आस पास और रिश्तेदारों का भी ख्याल रखना है. ऐसा ना हो की हम इफ्तार और शहरी करें और किसी की थाली खाली रह जाए. इस लिए सभी का ख्याल रखना जरूरी है.       

    जनाब कासमी ने बताया कि अल्लाह के प्यारे नबी हजरत मोहम्मद मुस्तफा सलल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फ़रमाया रमज़ान मे सदका करना सबसे ज्यादा सवाब का काम है.  रमजान में गरीबों और मिस्कीनों  की ज्यादा से ज्यादा मदद करना चाहिए.  उन्होंने बताया कि नबी सलल्लाहो अलैहे वसल्लम ने बताया जब रमज़ान आता है तो जन्नत के दरवाजे खोल दिया जाते है, और जहन्नम के दरवाजे बंद कर दिये जाते है. रमजान में रोजा रखने के लिए कामों में कमी ला देनी चाहिए.  रमजान का रोजा फ़र्ज़ है, रमजान का रोजा नहीं छोड़ सकते.  


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