कोयला मंत्रालय -कोल् इंडिया की नजर बीसीसीएल पर,भ्रष्टचार  पर "चाबुक" की क्या है तैयारी

    कोयला मंत्रालय -कोल् इंडिया की नजर बीसीसीएल पर,भ्रष्टचार  पर "चाबुक" की क्या है तैयारी
    "प्राइवेट प्लेयर" से दबाव झेल रही देश -दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया अब कार्य संस्कृति में बदलाव की दिशा में आगे बढ़ गई है.

    धनबाद(DHANBAD):  "प्राइवेट प्लेयर" से दबाव झेल रही देश -दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया अब कार्य संस्कृति में बदलाव की दिशा में आगे बढ़ गई है.  कोयला मंत्रालय से पूरा सहयोग मिल रहा है.  अभी हाल ही में खबर आई थी कि सीआईएसएफ को और अधिक सक्षम बनाया जाएगा।  अब सीआईएसएफ  जिला पुलिस के भरोसे   नहीं रहेगा, वह स्वतंत्र रूप से एक्शन  कर सकेगा।  कोयला चोरी रोकने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है.  इधर, सूत्र दावा कर रहे हैं कि कोल इंडिया की सबसे बड़ी इकाई बीसीसीएल के सीएमडी  ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट कोल इंडिया और कोयला मंत्रालय को भेजी थी.  

    बन रही सूची को लेकर क्यों मचा है हड़कंप ---

    सूत्र बता रहे हैं कि अब उस पर एक्शन शुरू हो गया है.  वैसे, तो कोल इंडिया में कार्य संस्कृति में सुधार के लिए अधिकारियों की  ट्रांसफर- पॉलिसी में अब बड़ा बदलाव कर दिया है.  लेकिन, इधर कोल इंडिया और कोयला मंत्रालय की नजर बीसीसीएल पर टिक गई है.  बताया जा रहा है कि कोल इंडिया मैनेजमेंट ने बीसीसीएल के "दागी" अधिकारियों की सूची तलब की है.  इन अधिकारियों में वैसे लोगों को शामिल किया गया है, जो की जांच एजेंसियों के रडार पर हैं, जिनके खिलाफ निगरानी अथवा सीबीआई में जांच चल रही है.  सूत्रों के अनुसार कोल इंडिया ने बीसीसीएल प्रबंधन को कहा है कि ऐसे अधिकारियों की सूची तुरंत दी जाए, जिनके खिलाफ विजिलेंस जांच चल रही हो.  अथवा जिन पर भ्रष्टाचार, अनियमितता, कोयला चोरी में शामिल होने के आरोप  हों.  जिन पर आउटसोर्सिंग कंपनियों से सांठगांठ  का आरोप  हो. 

    बीसीसीएल में बड़े और चौंकाने वाले बदलाव की तैयारी ----
     
    यह भी  बताया जा रहा है कि सूची मिलने के बाद बीसीसीएल में बड़े बदलाव हो सकते हैं.  दरअसल, प्रबंधन के लाख प्रयास के बावजूद कोयला चोरी रुक नहीं रही है.   इससे  कंपनी को आर्थिक नुकसान हो रहा है.  चोरी का कोयला सस्ते दर पर उपलब्ध हो जाने की वजह से कंपनी के कोयले के खरीदार भी कम गए हैं.  पावर प्लांट भी बीसीसीएल से कोयला लेने में रुचि नहीं दिखला रहे हैं.   बीसीसीएल के नए सीएमडी  ने सार्वजनिक मंच से कह चुके हैं  कि बीसीसीएल की आर्थिक सेहत ठीक करने के लिए कोयला चोरी पर पूर्ण रूप से रोक  जरूरी है.  अब इस पर कार्रवाई शुरू हुई है, देखना है आगे --आगे होता है क्या?उल्लेखनीय है कि  कोयला अधिकारियों और ठेकेदारों के गठजोड़ को तोड़ने के लिए कोल इंडिया ने एक नई तरकीब की शुरुआत की है.   ट्रांसफर पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया है.   अब प्रमोशन पाने वाले  अधिकारी उसी  कंपनी में जमे  नहीं रह पाएंगे।  ऐसा होने से कोयला अधिकारी  और बाहर के लोगों के साथ गठजोड़ टूटेगा और कंपनी का काम दुरुस्त चाल में चल सकता  है. 

    नई ट्रांसफर पॉलिसी  तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है ----

    यह नीति इमीडिएट इफेक्ट से लागू कर दी गई है.  नए प्रावधान के तहत E5 से E6 ग्रेड में प्रमोशन पाने वाले अधिकारियों को एक सहायक कंपनी से दूसरी कंपनी में ट्रांसफर जरूरी कर दिया गया है.  हालांकि इसमें कुछ लचीलापन भी रखा गया है.  जैसे जिन अधिकारियों ने अनुरोध के आधार पर ट्रांसफर लिया है और अभी निर्धारित कार्यकाल पूरा नहीं किया है, उन्हें अस्थाई रूप से वर्तमान कंपनी में पदभार ग्रहण करने की अनुमति दी जा सकती है.  लेकिन तय अवधि के बाद उन्हें स्थानांतरित कंपनी में योगदान देना होगा।  आदेश में यह भी  प्रावधान किया गया है कि किसी भी सहायक कंपनी के सीएमडी  को जरूरत  को देखते हुए अधिकतम 5% अधिकारियों को पदोन्नति के बाद अस्थाई रूप से रोकने का अधिकार रहेगा।  लेकिन यह रोक  अधिकतम एक  साल तक प्रभावी रहेगा।  इसके बाद संबंधित अधिकारी को स्थानांतरित कंपनी में योगदान देना होगा।  इस अवधि के बाद न तो विस्तार दिया जाएगा और न हीं पदोन्नति रद्द करने की अनुमति मिलेगी।  

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो


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