देवघर में विद्यालयों की उदासीनता से मिजिल्स रूबेला टीकाकरण पर दिख रहा है असर,17दिन में महज 36 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति

    देवघर में विद्यालयों की उदासीनता से मिजिल्स रूबेला टीकाकरण पर दिख रहा है असर,17दिन में महज 36 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति

    देवघर(DEOGHAR): 12 अप्रैल से राज्यभर में शुरू हुए खसरा जैसी खतरनाक बीमारी के उन्मूलन को लेकर टीकाकरण अभियान के प्रति स्कूल प्रबंधकों की उदासीनता रवैया सामने आया है. पिछले 17 दिनों में टीकाकरण को लेकर महज 36 फीसदी ही लक्ष्य की प्राप्ति हो पाई है. फिलहाल राज्य के 9 जिलों में शुरू हुए इस टीकाकरण अभियान में देवघर जिला सातवें स्थान पर है. 

    9 से 15 वर्ष तक के बालक-बालिकाओं को लगाना है टीका

    पूरे ताम झाम से 12 अप्रैल से शुरू हुए इस मिजिल्स रूबेला अभियान के तहत 9 से 15 वर्ष तक के सभी बालक बालिकाओं को टीकाकरण सुनिश्चित करना है. लेकिन देवघर के कुछ स्कूलों के प्रबंधकों की उदासीनता के कारण लक्ष्य के अनुरूप आधा भी पूरा नहीं हुआ है. 5 लाख 50 हज़ार 13 बालक बालिकाओं को टीकाकरण करने का लक्ष्य निर्धारित है. अभीतक मात्र 1 लाख 97 हज़ार 829 का ही टीकाकरण सुनिश्चित हो पाया है. गंभीर बीमारी खसरा के उन्मूलन के प्रति संबंधित विभाग और स्कूल प्रबंधकों की उदासीनता कहीं न कही बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ तो नहीं किया जा रहा. 

    सिविल सर्जन ने DSE और DEO को किया पत्राचार

    लाख कोशिशों के बाबजूद लक्ष्य के अनुरूप सफलता नहीं देखते हुए सिविल सर्जन डॉ युगल किशोर चौधरी ने मिजिल्स रूबेला टीकाकरण की उपलब्धि पर असंतोष व्यक्त किया है.  उन्होंने  जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला शिक्षा अधीक्षक को पत्राचार कर स्कूलों में हुए टीकाकरण का ब्यौरा मांगा है. 

    टीका पूरी तरह सुरक्षित, गंभीरता दिखाने की जरूरत

    मिजिल्स रूबेला का टीकाकरण पूरी तरह से सुरक्षित है इसके प्रति गंभीरता से अभिभावक और स्कूल प्रबंधक को आगे बढ़ चढ़ कर भाग लेना होगा तभी पोलियो के बाद खसरा मुक्त बन सकता है. 

    रिपोर्ट: रितुराज सिन्हा 



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