रैयतों के हक़ पर बड़ा डाका : धनबाद के चार मौजा की जमीन मुआवजे भुगतान में की गई थी "लूट", कुल 17 गिरफ्तारियां !

    रैयतों के हक़ पर बड़ा डाका : धनबाद के चार मौजा की जमीन मुआवजे भुगतान में की गई थी "लूट", कुल 17 गिरफ्तारियां !

    धनबाद (DHANBAD) : धनबाद के जमीन मुआवजा घोटाले में कुल  17 लोगों की गुरुवार की रात से शुक्रवार की सुबह तक गिरफ्तारी हुई है. यह गिरफ्तारी रांची से लेकर देवघर,धनबाद  तक से की गई है. उस समय के जिला भू अर्जन  पदाधिकारी, अंचल अधिकारी भी अरेस्ट कर लिए गए है. सूत्रों के अनुसार इस मामले में लगभग 237 करोड़ का भुगतान जेआरडीए  ने किया था.  वैसे कुल  घोटाला 300 करोड रुपए से अधिक का बताया जाता है. दरअसल, धनबाद के चार मौजा धोकरा , धनबाद ,दुहाटांड़ और मनईटांड़ मौजा  में जमीन अधिग्रहित की गई थी और उसका भुगतान किया गया था.  मामला सिर्फ भुगतान का ही नहीं है.  जमीन के अधिग्रहण और नामांतरण से भी यह मामला जुड़ा हुआ है.
     
    2014 में राज्य सरकार ने ACB को सौंपी थी जाँच की जिम्मेवारी 
     
    इस गंभीर मामले की जांच वर्ष 2014 में राज्य सरकार ने ACB को सौंपी थी. प्रारंभिक जांच में अनियमितताएं सामने आने के बाद तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी उदयकांत पाठक, लाल मोहन नायक सहित कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था. धनबाद में रिंग रोड निर्माण को लेकर राज्य सरकार द्वारा रैयतों की भूमि अधिग्रहित की गई थी. रैयतों को भूमि के मुआवजा भुगतान में भारी गड़बड़ी की गई.  एक अनुमान के मुताबिक मुआवजा भुगतान में 300 करोड़ तक की गड़बड़ी का आरोप है.  2014 में मामला उजागर होने के बाद राज्य सरकार ने पूरे मामले की जांच  एसीबी को सौंप दी. 

    मामले से जुड़े कई अधिकारी पहले किये गए थे निलंबित, अब गिरफ़्तारी भी 
     
    प्रारंभिक जांच में भी गड़बड़ी की पुष्टि हुई, तत्कालीन जिला भू अर्जन पदाधिकारी उदयकांत पाठक, लाल मोहन नायक सहित कई अन्य अधिकारी निलंबित भी किये गए. कई अवकाश ग्रहण कर चुके है. कुछ को सेवा से बर्खास्त भी किया गया था.  बता दें कि  कि मुआवजा नहीं मिलने के कारण कई रैयत पिछले एक दशक से न्याय के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे.  इस लंबी प्रतीक्षा के दौरान कई पीड़ितों की मौत हो चुकी है. ताजा कार्रवाई के बाद पीड़ितों में न्याय मिलने की उम्मीद एक बार फिर जगी है. मामले में आगे और गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 



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