मंडल संसदीय समिति बड़ी अथवा रेलवे के महाप्रबंधक ,धनबाद "कमाता" है इसलिए तकलीफ झेलता है 

    मंडल संसदीय समिति बड़ी अथवा रेलवे के महाप्रबंधक ,धनबाद "कमाता" है इसलिए तकलीफ झेलता है

    धनबाद(DHANBAD) |  धनबाद मंडल संसदीय समिति बड़ी है अथवा पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक बड़े है. यह प्रश्न  धनबाद मंडल संसदीय समिति के औचित्य पर भी सवाल है. यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि मंडल संसदीय समिति की  जब भी बैठक होती है, पहली  डिमांड यही होती है कि धनबाद से दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन चलाई जाए.  लेकिन गुरुवार को पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक अनिल कुमार खंडेलवाल ने धनबाद में कहा कि फिलहाल धनबाद से दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन की जरूरत नहीं है.  धनबाद लोडिंग डिवीजन है, इसलिए यहां से ट्रेन शुरू नहीं की जा रही है.  आगे- पीछे के स्टेशनों से ट्रेन चलाकर यहां की जरूरत को पूरी  की जा रही है.  धनबाद होकर दिल्ली के लिए कई ट्रेनें चल रही है. 

    तो क्या लोडिंग डिवीज़न का खामियाजा भुगत रहा धनबाद 
     
    यह जरूरी नहीं है कि हर स्टेशन से किसी विशेष स्टेशन के लिए ट्रेन चले.  मतलब साफ है कि धनबाद से सीधी ट्रेन  की कोई योजना ही नहीं है. तो क्या  धनबाद लोडिंग डिवीजन है, इसलिए इसे सीधी ट्रेन की सुविधा नहीं मिल रही है.  सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर जोनल अधिकारी ही नहीं चाह रहे हैं, तो फिर ट्रेन कैसे चल सकती है.   अधिकारियों का जो यह बयान आता है कि प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया गया है,मतलब झूठा है. जोन में तो महाप्रबंधक से बड़ा कोई अधिकारी होता नहीं है.   महाप्रबंधक तो साफ़ कह रहे  हैं कि धनबाद से सीधी ट्रेन की जरूरत ही नहीं है. हां , यह जरूर कहा कि धनबाद से गुजरने वाली दिल्ली की ट्रेनों में यहां से चढ़ने वाले यात्रियों और वेटिंग लिस्ट के अवलोकन के लिए रेलवे बोर्ड में विशेष सेल है. वहां सबकुछ अंकित होता है.  उन्होंने धनबाद रेल मंडल  की उपलब्धियां की तो मुक्त कंठ से प्रशंसा की और कहा कि जो छोटी-मोटी दिक्तते  हैं, उन्हें  भी जल्द पूरा किया जा रहा है.  उन्होंने स्टेशन सुरक्षा पर भी कहा कि इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और इसे ठोस बनाया जाएगा.  धनबाद देश का नंबर वन रेलवे डिवीजन है. 
     
    राजस्व देने में देश भर में बजता है धनबाद का डंका 
     
    राजस्व देने में देश भर में इसका डंका बजता है.  लेकिन ट्रेन सुविधाओं की बात आती है तो कहा जाता है  कि यह  लोडिंग डिवीजन है ,इसलिए आगे पीछे के स्टेशनों से ट्रेन चलाई जा रही है. गुरुवार को महाप्रबंधक ने जो बातें कही, वह यहां के जनप्रतिनिधियों के लिए भी चुनौती है.  मंडल संसदीय समिति की बैठकों की मांग को क्या कभी जोनल ऑफिस से रेलवे बोर्ड भेजा गया है अथवा नहीं ,इसकी पड़ताल कौन करेगा.  अगर भेजा गया होता  तो महाप्रबंधक यह क्यों कहते कि धनबाद को दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन की जरूरत नहीं है.  अभी हाल ही में मंडल संसदीय समिति की बैठक हुई थी.  जिसमें सांसदों ने  सीधी ट्रेन की मांग उठाई थी, लेकिन अब महाप्रबंधक के कथन के बाद उनकी मांगों का क्या होगा, यह तो उन्हें खुद जानना -समझना होगा.लगभग 75 सालों के धनबाद रेल मंडल के साथ ,यहाँ के यात्रियों के साथ ,चाहे ट्रेन  की बात हो या प्लेन  की , क्या सरकार न्याय कर रही है. इसका जवाब तो लोग जनप्रतिनिधियों से ही पूंछेंगे. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो



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