मकर संक्रांति 2025: आज से एक माह तक बाबा बैद्यनाथ पर नई फसल से तैयार चूड़ा का लगेगा भोग, तिल चढ़ाने की भी है परंपरा 

    मकर संक्रांति 2025: आज से एक माह तक बाबा बैद्यनाथ पर नई फसल से तैयार चूड़ा का लगेगा भोग, तिल चढ़ाने की भी है परंपरा 

    देवघर(DEOGHAR): पौष मास में जिस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है उस दिन मकर संक्रांति मनाई जाती है. आज से सूर्य दक्षिण से उत्तर की ओर भ्रमण करने लगता है. जिससे अब दिन बड़ा और रात छोटी लगने लगेगी. दूसरी ओर आज से ऋतु परिवर्तन की शुरुआत भी हो जाती है. मकर संक्रांति पर पवित्र नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है और आज के दिन दान करने से पुण्य प्राप्त होती है. 

    मकर संक्रांति पर बाबा बैद्यनाथ को विशेष भोग चढ़ाया गया

    मकर संक्रांति के अ‌वसर पर आज देवघर स्थित पवित्र द्वादश ज्योर्तिलिंग के जलार्पण के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगी है. आज के दिन बाबा बैद्यनाथ के जलार्पण और पूजा अर्चना के साथ तिल और दही-चूड़ा चढ़ाने की अति प्राचीन परंपरा रही है. ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के अवसर पर कामना लिंग को तिल और दही-चूड़ा का भोग लगाने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है. देश-विदेश से श्रद्धालु आज के दिन बाबा की विशेष पूजा- अर्चना करने देवघर पहुंचते है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार आज के दिन नई फसल से तैयार चूड़ा बाबा को अर्पित कर साल भर के लिए मंगल कामना की जाती है. आज से लगातार एक माह तक बाबा बैद्यनाथ को नई फसल का चूड़ा चढ़ाया जाएगा इसके अलावा तील या इससे निर्मित मिठाई भी चढ़ाई जाती है. मकर संक्रांति को नई ऊर्जा,समृद्धि और पवित्रता का प्रतिक माना जाता है.

    रिपोर्ट: रितुराज सिन्हा 


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