टीएनपी डेस्क (TNP DESK): Bharat Coking Coal Limited में नौकरी दिलाने के नाम पर झारखंड के कई इलाकों में बड़े स्तर पर ठगी का मामला सामने आया है. डकरा, खलारी, पिपरवार, टंडवा, भुरकुंडा, हजारीबाग और बड़कागांव समेत कई क्षेत्रों में सक्रिय एक संगठित गिरोह पर करीब 200 लोगों से लगभग 20 करोड़ रुपये ऐंठने का आरोप लगा है. शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस जांच में जुट गई है, जबकि आरोपी मोबाइल बंद कर फरार बताए जा रहे हैं.
कांग्रेस नेत्री से 24 लाख की ठगी
डकरा निवासी कांग्रेस नेत्री इंदिरा देवी ने खलारी थाना में शिकायत दर्ज कर बताया कि उनके बेटे मनीष कुमार, कुणाल कुमार और भतीजे कौशल प्रसाद को बीसीसीएल में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 24 लाख रुपये ठग लिए गए. उनके मुताबिक, चूरी उत्तरी के पूर्व मुखिया संजय आइंद की पत्नी मीनाक्षी आइंद ने दावा किया था कि उनकी बेटियां साक्षी और श्रेया की नौकरी बीसीसीएल में लग चुकी है. इसी भरोसे पर इंदिरा देवी की मुलाकात केडी खलारी निवासी अजय कुमार सिन्हा और पवन कुमार से कराई गई, जिन्होंने खुद को नौकरी लगवाने वाला “सेटिंगबाज” बताया.
फर्जी ज्वाइनिंग लेटर और मेडिकल टेस्ट का ड्रामा
पीड़िता के अनुसार, आरोपियों ने कथित ज्वाइनिंग लेटर दिखाकर भरोसा जीता. पहले चेक के जरिए भुगतान की कोशिश हुई, लेकिन बाद में पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी निवासी सागर चक्रवर्ती के शानवी इंटरप्राइजेज खाते में 24 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए. पैसे मिलने के बाद स्टांप पेपर पर एग्रीमेंट कराया गया और युवकों को धनबाद बुलाकर होटल में ठहराया गया. इसके बाद पीएमसीएच में मेडिकल जांच कराई गई, जहां कई अन्य युवकों की भी जांच चल रही थी. इससे लोगों को पूरा मामला असली भर्ती प्रक्रिया जैसा लगा.
बायोमेट्रिक और ट्रेनिंग के नाम पर फंसाए गए युवक
शिकायत में कहा गया है कि दूसरी बार युवकों को धनबाद बुलाकर लोदना एरिया में बायोमेट्रिक हस्ताक्षर और कथित बीटीसी ट्रेनिंग कराई गई. वहां अभ्यर्थियों की एक सूची भी दिखाई गई, जिसमें करीब 200 युवाओं के नाम और पोस्टिंग एरिया दर्ज थे. लेकिन इसके बाद किसी को ज्वाइनिंग लेटर नहीं मिला. धीरे-धीरे आरोपियों ने फोन उठाना बंद कर दिया और पूरा नेटवर्क गायब हो गया.
जांच में पता चला है कि गिरोह ने पूरे रैकेट को नेटवर्क मार्केटिंग मॉडल की तरह चलाया. पहले लोगों को नौकरी का लालच दिया गया, फिर उनसे कहा गया कि नए उम्मीदवार जोड़ने पर उनका खुद का काम बिना पैसे के हो जाएगा. इसी चक्कर में कई लोग एजेंट बन गए और अपने रिश्तेदारों व परिचितों को भी इस जाल में फंसाते चले गए. बताया जा रहा है कि गिरोह का एक चैनल सागर चक्रवर्ती और दूसरा मुस्तकीम अंसारी संचालित कर रहा था.
सूत्रों के मुताबिक, पिपरवार के एक व्यक्ति ने अकेले करीब पांच करोड़ रुपये जुटाकर गिरोह तक पहुंचाए. वहीं डकरा के एक सीसीएल कर्मचारी ने अपने रिश्तेदारों से करीब 75 लाख रुपये इकट्ठा कर दिए. अब कई पीड़ित मानसिक तनाव में हैं और सामाजिक बदनामी के डर से खुलकर सामने आने से बच रहे हैं. पीड़ितों का आरोप है कि मुस्तकीम अंसारी खुद को कांग्रेस और ट्रेड यूनियन नेता बताकर लोगों पर प्रभाव जमाता था, जबकि सागर चक्रवर्ती अपने आपको टीएमसी नेता बताता था. मामले में कई अन्य लोगों के नाम भी सामने आ रहे हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है. खलारी थाना पुलिस का कहना है कि मामले की शुरुआती जांच चल रही है. कुछ लोगों को नोटिस भेजा गया है, लेकिन फिलहाल आरोपी संपर्क से बाहर हैं. पुलिस ने शिकायतकर्ता द्वारा किए गए पैसों के लेनदेन का सत्यापन कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है.

