MahaShivratri : महादेव का रहस्य!  क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि, क्या है इसकी मान्यता और कैसे करें व्रत-पूजा?

    MahaShivratri : महादेव का रहस्य!  क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि, क्या है इसकी मान्यता और कैसे करें व्रत-पूजा?

    महाशिवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है, जिसे फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को मनाया जाता है. यह रात भगवान शिव और शक्ति के दिव्य मिलन की प्रतीक मानी जाती है. “शिव” का अर्थ है कल्याण और “रात्रि” का अर्थ है अज्ञान का अंधकार. मान्यता है कि इस पावन रात में व्रत, उपवास और जागरण करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

    क्या है शिवरात्रि की पौराणिक मान्यता?

    शिवरात्रि से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं. एक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. इसलिए इसे दिव्य विवाह की रात भी कहा जाता है.

    दूसरी कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है. जब देवताओं और असुरों द्वारा समुद्र मंथन किया गया, तब सबसे पहले विष “हलाहल” निकला. उस विष से सृष्टि को बचाने के लिए भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया. तभी से उनका नाम नीलकंठ पड़ा. मान्यता है कि यह घटना भी शिवरात्रि की रात हुई थी.

    एक और धार्मिक विश्वास यह है कि इसी रात शिवलिंग का प्रथम प्राकट्य हुआ था. इसलिए इस दिन शिवलिंग की विशेष पूजा का विधान है.

    कैसे करें व्रत और पूजा?

    महाशिवरात्रि के दिन श्रद्धालु प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और व्रत का संकल्प लेते हैं. व्रत निर्जला, फलाहार या केवल दूध-फल लेकर रखा जा सकता है.

    पूजा विधि इस प्रकार है : 

    शिवलिंग का जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें.

    बेलपत्र, धतूरा, भांग, अक्षत और सफेद फूल अर्पित करें.

    “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें.

    रात भर जागरण कर भजन-कीर्तन करें.


    चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है. प्रत्येक प्रहर में अलग-अलग सामग्री से अभिषेक करने का विधान है. माना जाता है कि सच्चे मन से की गई उपासना से शिव प्रसन्न होकर भक्तों को सुख-समृद्धि और शांति का आशीर्वाद देते हैं.

    शिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व

    शिवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और साधना की रात है. यह हमें अपने भीतर के अंधकार, अहंकार और नकारात्मकता को त्यागने की प्रेरणा देती है. ध्यान और मंत्रजाप से मन को शांति मिलती है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है.

    महाशिवरात्रि की यह पावन रात हमें यह संदेश देती है कि यदि सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान शिव की आराधना की जाए, तो जीवन के हर संकट से मुक्ति संभव है. हर-हर महादेव!


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