Lok sabha eleection: दुमका में सीता सोरेन के सामने नलीन सोरेन तो राजमहल में ताला मरांडी के सामने कौन? चर्चाओं का बाजार गर्म   

    Lok sabha eleection: दुमका में सीता सोरेन के सामने नलीन सोरेन तो राजमहल में ताला मरांडी के सामने कौन? चर्चाओं का बाजार गर्म   

    दुमका(DUMKA):दुमका के दंगल में बीजेपी ने पहले सुनील सोरेन को प्रत्याशी बनाया तो बाद में सुनील से टिकट वापस लेते हुए सीता सोरेन को चुनावी समर में उतार दिया.सीता सोरेन झामुमो सुप्रीमो शीबू सोरेन की बड़ी पुत्रबधू और स्व. दुर्गा सोरेन की पत्नी है, जो हाल ही में झामुमो छोड़ कमल पर सवार हुई है. बीजेपी द्वारा सीता सोरेन को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद से ही एक सवाल लोगों के जेहन में उठ रहा था कि सोरेन परिवार की बहू सीता की भिड़ंत किससे होगी? कयासों का बाजार गर्म रहा. कभी हेमंत सोरेन तो कभी कल्पना सोरेन का नाम सामने आया.  

    झामुमो की पहली सूची में राजमहल लोस से प्रत्याशी का नाम नहीं होने से चर्चा तेज

         आखिरकार झामुमो ने नाम स्पष्ट कर दिया. लगातार 7 टर्म से शिकारीपाड़ा विधानसभा क्षेत्र से प्रतिनिधित्व कर रहे विधायक नलीन सोरेन पर दाव लगाया.दुमका सहित गिरिडीह के प्रत्याशी के नाम की घोषणा झामुमो ने कर दी. इंडिया गठबंधन के तहत झामुमो को 5 सीट पर अपना प्रत्याशी देना है.झामुमो द्वारा जारी पहली सूची में संथाल परगना के राजमहल लोक सभा सीट से प्रत्याशी का नाम नहीं होने पर एक बार फिर चर्चा का माहौल गर्म है.  

    वर्ष 2019 के चुनाव में झामुमो के इकलौते सांसद निर्वाचित हुए थे बिजय हांसदा

       वर्ष 2019 के चुनाव में एक मात्र राजमहल सीट से झामुमो को सफलता मिली थी और विजय हांसदा दोबारा सांसद चुने गए थे. पहली सूची में बतौर प्रत्याशी सीटिंग एमपी का नाम नहीं होने पर इसकी चर्चा चौक चौराहे पर होने लगी है.सवाल उठता है कि क्या झामुमो राजमहल सीट से प्रत्याशी बदलने की सोच रहा है या फिर गठबंधन के तहत राजमहल सीट ही बदलना चाह रही है? 

     गठबंधन के तहत झामुमो बदलेगा राजमहल सीट या फिर बदला जाएगा प्रत्याशी?

        इन दो मुद्दों पर अलग अलग तर्क दिए जा रहे है. बताया जा रहा है कि बोरियो से झामुमो विधायक लोबिन हेम्ब्रम खुल कर बिजय हांसदा का विरोध कर रहे है, लोबिन ने यहां तक कह डाला है कि यदि राजमहल से प्रत्याशी नहीं बदला गया तो वे निर्दलीय मैदान में ताल ठोकेंगे.हो सकता है लोबिन की इस धमकी पर पार्टी नफा नुकसान का आकलन कर रही हो.वैसे भी राजमहल सीट से झामुमो के पास प्रत्याशी की कमी नहीं है क्योंकि राजमहल के पूर्व सांसद हेमलाल मुर्मू ने बीजेपी को छोड़ घर वापसी कर ली है.लोबिन हेम्ब्रम भी अपनी दावेदारी पेश कर चुके हैं.  

    निशिकांत के बयान में है दम या फिर साबित होंगे हवा हवाई!

       दो दिन पूर्व दुमका में गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने एक बयान दिया था.उन्होंने कहा था कि गोड्डा लोकसभा सीट से यदि झामुमो अपना प्रत्याशी देता है या फिर कांग्रेस प्रदीप यादव को मैदान में उतारती है तो वे अपना चुनाव प्रचार नहीं करेंगे. जब उनसे पूछा गया कि गोड्डा लोकसभा सीट पर कांग्रेस का दावा है तो झामुमो द्वारा प्रत्यासी उतारने का सवाल कहां से आ गया.इस पर उन्होंने कहा था कि गोड्डा लोकसभा सीट पर झामुमो की दावेदारी की बात भी चल रही है. निशिकांत दुबे की इस दावे पर गौर करें तो इन दिनों संथाल परगना के एक बीजेपी नेता का कभी कांग्रेस तो कभी झामुमो में जाने और गोड्डा लोक सभा सीट से मैदान में उतरने की चर्चा फिजां में तैर रही है.बीजेपी में रहते हुए भी उस नेता का निशिकांत दुबे से 36 का आंकड़ा रहा है.इस स्थिति में कहीं ऐसा तो नहीं कि झामुमो राजमहल सीट कांग्रेस को देकर गोड्डा लोक सभा से बीजेपी के उस कद्दावर नेता को अपनी पार्टी में शामिल करा कर मैदान में उतार दे.वैसे भी गोड्डा से कांग्रेस के कई दावेदार के सामने आने की वजह से पार्टी को निर्णय लेने में काफी सोच विचार करना पड़ रहा है. इस वजह से अभी तक झामुमो द्वारा राजमहल सीट से प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं कि गयी हो. वैसे तो संथाल परगना प्रमंडल के तीनों लोक सभा सीट पर अंतिम चरण में मतदान होना है, लेकिन इतना जरूर है कि प्रमंडल के तीनों सीट पर बेहद दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा.  

    रिपोर्ट-पंचम झा 


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