नक्सलियों और अपराधियों को लोहरदगा पुलिस की चेतावनी, एक महीने में खत्म होगा डर का साया


लोहरदगा (LOHARDAGA): झारखंड के कई जिलों की तरह लोहरदगा भी कभी नक्सली हिंसा का गढ़ माना जाता था. जंगलों और पहाड़ों में नक्सलियों का दबदबा था और आए दिन गोलीबारी व विस्फोट की घटनाएं होती थीं. लेकिन समय के साथ सुरक्षा बलों की रणनीति बदली और हालात में बड़ा बदलाव आया. अब लोहरदगा पुलिस ने जिले को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाने का स्पष्ट लक्ष्य तय कर लिया है. पुलिस ने नक्सलियों और अपराधियों को एक महीने की डेडलाइन दी है.
इस संबंध में पुलिस अधीक्षक सादिक अनवर रिजवी ने साफ कहा है कि जिले में बचे हुए नक्सली और आपराधिक गिरोहों को अगले एक महीने के भीतर या तो गिरफ्तार किया जाएगा या वे आत्मसमर्पण के लिए मजबूर होंगे. एसपी ने कहा कि जो नक्सली और उग्रवादी स्वेच्छा से मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए आत्मसमर्पण का रास्ता खुला है. लेकिन तय समय सीमा के भीतर सरेंडर नहीं करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
अभियान में पुलिस को मिली अहम कामयाबी
नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान लोहरदगा पुलिस को हाल के महीनों में कई बड़ी सफलताएं हाथ लगी हैं. भाकपा माओवादी, जेजेएमपी और पीएलएफआई से जुड़े कई नक्सली और अपराधी पकड़े जा चुके हैं. 17 अक्टूबर 2025 को पुलिस ने चार अपराधियों को हथियारों के साथ गिरफ्तार किया था. इसके बाद 20 अक्टूबर 2025 को एक अन्य अपराधी जसीम पवारिया को भी हथियार सहित पकड़ा गया.
इसी क्रम में 26 नवंबर 2025 को भाकपा माओवादी संगठन के रीजनल कमांडर रविंद्र गंझू के दस्ते के सदस्य राजा हेमंत असुर उर्फ राजन असुर को गिरफ्तार किया गया. वहीं 6 दिसंबर 2025 को जेजेएमपी संगठन से जुड़े दो समर्थकों को हथियार और कारतूस के साथ दबोचा गया.
इनामी नक्सलियों की तलाश तेज
फिलहाल जिले में भाकपा माओवादी संगठन का 15 लाख रुपये का इनामी नक्सली रविंद्र गंझू और कुछ छोटे आपराधिक गिरोहों के सदस्य फरार बताए जा रहे हैं. इनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है. लोहरदगा पुलिस का दावा है कि तय समय सीमा के भीतर जिले से नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया कर दिया जाएगा.
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