टीएनपी डेस्क (TNP DESK): झारखंड में इन दिनों वेतन भुगतान को लेकर गंभीर स्थिति बनी हुई है. राज्यकर्मियों का वेतन अब तक सामान्य रूप से जारी नहीं हो पा रहा है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है. निर्धारित प्रक्रिया के तहत कर्मचारी फॉर्म भरकर जमा कर रहे हैं और डीडीओ द्वारा उसका सत्यापन भी किया जा रहा है, इसके बावजूद कोषागार स्तर पर भुगतान अटक जा रहा है. जानकारी के अनुसार, कोषागार की ओर से बार-बार तकनीकी आपत्तियां और क्वेरी उठाई जा रही हैं, जिसके कारण भुगतान प्रक्रिया में देरी हो रही है.
सूत्रों की मानें तो स्थिति सामान्य होने में अप्रैल का पूरा महीना लग सकता है. इस बीच हैरानी की बात यह है कि राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार का वेतन भी पिछले तीन दिनों से लंबित बताया जा रहा है. रांची कोषागार से मिली जानकारी के अनुसार, राज्यपाल के वेतन भुगतान का प्रस्ताव 13 अप्रैल को भेजा गया था, लेकिन कुछ आपत्तियों के साथ इसे वापस कर दिया गया. 14 अप्रैल को अवकाश होने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी, जबकि 15 अप्रैल की रात तक भी भुगतान नहीं हो पाया.
हालांकि, कैबिनेट और मुख्यमंत्री सचिवालय से जुड़े कर्मियों का वेतन प्रारंभिक चरण में ही जारी कर दिया गया था. वहीं, दूसरी ओर राज्य में कोषागारों से फर्जी निकासी के मामलों को लेकर भी सरकार सख्त नजर आ रही है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इन मामलों की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया है.
बताया जा रहा है कि एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में एसआईटी बनाई जाएगी, जो पूरे मामले की जांच करेगी. हालांकि देर शाम तक इस संबंध में वित्त विभाग और सीआईडी की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की जा सकी थी. ऐसे में यह साफ नहीं हो पाया है कि जांच की कमान किसे सौंपी जाएगी. फिलहाल वेतन भुगतान में देरी और फर्जी निकासी के मामलों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
Thenewspost - Jharkhand
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