घोड़ी छोड़ बैलगाड़ी पर सवार हुए दुल्हे राजा, दुल्हनियां को लेने पहुंचे ससुराल, जानें फिर क्या हुआ  

    गोमिया(GOMIYA):अब तक आप लोगों ने किसी भी दूल्हे को घोड़ी पर सवार होकर बारात लेकर जाते देखा होगा. लेकिन आज हम आपको एक ऐसी खबर बताने जा रहे हैं, जहां अपनी दुल्हन को लेने दूल्हा बैलगाड़ी पर सवार होकर पहुंचा. और सबसे खास बात ये है कि इस बारात में एक विधायक भी शामिल हुए. ये बारात देश में चर्चा का विषय बना हुआ है. तो आईए जानते हैं कि इसके पीछे दूल्हे की क्या सोच है.

    बैलगाड़ी पर सवार अपनी दुल्हनियां को लेने पहुंचे दुल्हे राजा

    चकाचौंध रोशनी और डीजे साउंड के बीच शादी करने की बात तो आज के आधुनिक युग में आम बात बन कर रह गई है. वहीं दूसरी तरफ बोकारो जिले के कसमार प्रखंड अंतर्गत गौरयाकुदर गांव का एक दूल्हा बैलगाड़ी पर सवार होकर बारातियों संग अपनी दुल्हन को लेने निकल पड़ा. हालांकि दुल्हन का घर दूल्हे के घर से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर है. इसकी वजह से सभी बाराती दूल्हे के संग नाचते-गाते दुल्हन के घर पैदल ही पहुंच गए.

    लोग दूल्हे को देखने के लिए उत्सुक नजर आये

    इस बीच बैलगाड़ी पर सवार दूल्हे को देखने के लिए लोग उत्सुक नजर आये. दुल्हन के घर पहुंचने पर बारातियों का स्वागत पारंपरिक रीति-रिवाज से किया गया. बारात निकलने से पहले बैलगाड़ी को बांस, फूल और आकर्षक रंगों से पूरी तरह से सजाया गया. बैलगाड़ी पर 60/40 नाय चलतों का नारा भी लिखा गया. आकर्षक तरीके से सजाएं गए बैलगाड़ी पर सवार होकर दूल्हा बने संदीप अपने दुल्हन कविता को लाने बारातियों संग निकल पड़े.

    गोमिया विधायक डॉ लम्बोदर महतो भी शामिल हुए

    बारातियों में गोमिया विधायक डॉ लम्बोदर महतो भी शामिल हुए. उन्होंने ही दूल्हे की बैलगाड़ी को बारातियों संग रवाना किया. इस दौरान लम्बोदर महतो ने कहा कि आज के आधुनिक युग में अपनी संस्कृति और पारंपरिक रिवाज को बचाने के लिए युवा आगे आ रहे हैं.  ये सचमुच में बड़े गौरव की बात है. एक तरफ जहां आधुनिक युग की परत जमती जा रही है. वहीं दूसरी तरफ इस तरह से अपने परम्परा को जीवित रखना आज के युवा के लिए एक अच्छा संदेश है.

    दुल्हे ने कहा रीति-रिवाज को जीवित रखना जरूरी है

    वहीं दूल्हा बने संदीप ने कहा कि अपनी संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाज को जीवित रखना जरूरी है. हमारी संस्कृति से ही हमारी पहचान बनी है. उसी संस्कृति और पहचान को आज के आधुनिक युग में बनाये रखने के लिए बैलगाड़ी पर सवार होकर दुल्हन लाने से बढ़िया और कुछ नहीं है. शादी के बाद दुल्हन बनी कविता भी अपने दूल्हे संदीप के साथ खुशी-खुशी बैलगाड़ी पर सवार होकर अपने ससुराल आई.

    रिपोर्ट-संजय कुमार


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