प्रकृति की गोद में अवस्थित लतरातु डैम: झारखंड के पर्यटन संभावनाओं की कैसे बन गया नई उम्मीद !

    प्रकृति की गोद में अवस्थित लतरातु डैम: झारखंड के पर्यटन संभावनाओं की कैसे बन गया नई उम्मीद !

    धनबाद(DHANBAD):  उग्रवाद से लड़ाई जीत कर रांची से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर प्रकृति की गोद में अवस्थित लतरातु डैम पर्यटकों की पहली पसंद बन गया है.  खूंटी जिला अंतर्गत लतरातु डैम एवं उसके आस-पास का क्षेत्र लंबे समय तक नक्सल समस्या से प्रभावित रहा है.  एक समय था जब इस इलाके में दिन के उजाले में भी लोगों का आना-जाना जोखिम भरा माना जाता था, लेकिन आज वही क्षेत्र शांति, विश्वास और विकास का प्रतीक बनकर उभर रहा है.  यह परिवर्तन स्वतः नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे राज्य सरकार की स्पष्ट पर्यटन नीति, जिला प्रशासन की सक्रिय भूमिका और राज्य के ही एक उद्यमी के साथ PPP (Public-Private Partnership) मोड में किए गए सुनियोजित प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई है. 

    सरकार के  पर्यटन को बढ़ावा देने के विजन को धरातल पर उतारते हुए जिला प्रशासन ने निजी क्षेत्र की सहभागिता से जिस तरह लतरातु डैम क्षेत्र को विकसित किया है, वह झारखंड में संभावनाओं को अवसर में बदलने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है.  यहां डैम के भीतर बोटिंग की व्यवस्थित सुविधा हो या जंगलों और पहाड़ों के बीच लगभग 6 किलोमीटर लंबा रमणीय ट्रैकिंग रूट हो, बच्चों के लिए विकसित खेल परिसर हो या फिर पास के टापू क्षेत्र में हर वर्ष आने वाले प्रवासी साइबेरियन पक्षियों की मधुर चहचहाहट—लतरातु अपने आप में सब कुछ समेटे हुए हर आयु वर्ग के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है.  जिस क्षेत्र में कभी सन्नाटा और भय का माहौल रहता था, वहां आज दिन-रात रांची, जमशेदपुर और खूंटी से आए प्रकृति प्रेमियों की चहल-पहल और खिलखिलाहट सुनाई देती है. 

    वैसे तो झारखंड पर्यटन की असीम संभावनाओं से भरपूर राज्य है, यह बात किसी से छिपी नहीं है, लेकिन लंबे समय से आवश्यकता इस बात की थी कि इन संभावनाओं को ठोस अवसरों में बदला जाए.  लतरातु डैम के समीप विकसित पर्यटक क्षेत्र और लतरातु नेचर रिसॉर्ट इस दिशा में एक मजबूत पहल के रूप में सामने आया है. आज यह स्थल केवल सैर-सपाटे तक सीमित नहीं है, बल्कि लोग यहां शादी, सालगिरह, जन्मदिन एवं अन्य विशेष अवसरों के आयोजन के लिए भी पहुंच रहे हैं.  उल्लेखनीय है कि हाल ही में लतरातु नेचर रिसॉर्ट में एक बहुप्रतीक्षित विवाह संपन्न हुआ, जिसमें दूल्हा जर्मनी का प्रतिष्ठित नागरिक है.  जानकारी के अनुसार, वर पक्ष ने विवाह आयोजन के लिए उदयपुर और जयपुर जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों का भी निरीक्षण किया था.  हालांकि वधू  पक्ष झारखंड अथवा रांची के आसपास ही किसी स्थान पर विवाह करना चाहता था, पर उपलब्ध व्यवस्थाएं वर पक्ष की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पा रही थीं।

    इसी बीच लगभग 4-5 महीने पहले शुरू हुए लतरातु डैम पर्यटन स्थल को देखने का सुझाव दिया गया.  अपेक्षा के विपरीत, पहली ही झलक में यह स्थल वर पक्ष और उनके साथ आए जर्मन मित्रों को अत्यंत पसंद आ गया.  झारखंड और विशेष रूप से प्रकृति की गोद में बसे लतरातु नेचर रिसॉर्ट के लिए उनके द्वारा व्यक्त किए गए प्रशंसा के शब्द निश्चित रूप से आने वाले समय में झारखंड को देश और विश्व के पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने में सहायक सिद्ध होंगे। उल्लेखनीय है कि लतरातु डैम में प्रशिक्षण प्राप्त कर यहां के स्थानीय युवा आज गोवा और चेन्नई जैसे समुद्री पर्यटन स्थलों पर बोट संचालन का कार्य कर रहे हैं.  यह स्थानीय क्षमता निर्माण और रोजगार सृजन का ऐसा मॉडल है, जो झारखंड के युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला रहा है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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