खून के रिश्ते पर भारी पड़ी जमीन,विक्रम शर्मा का छोटा भाई ही निकाला हत्यारा, पढ़े कैसे जमशेदपुर में तैयार किया गया था ब्लूप्रिंट


टीएनपी डेस्क(TNP DESK):उत्तराखंड के देहरादून में जमशेदपुर के हिस्ट्री शीटर विक्रम शर्मा की हत्या मामले में एक सनसनीखेज मोड़ आया है. जहां विक्रम शर्मा के छोटे भाई अरविंद शर्मा ने पुलिस के सामने आत्म समर्पण किया.बात अब पानी की तरह साफ़ हो चुकी है कि अपनों ने ही विक्रम शर्मा की जान ली है.विक्रम शर्मा अपराध की दुनिया का एक ऐसा नामचीन चेहरा था जिस तक पहुंचना सभी के बस की बात नहीं है, इस तरीके से खुलेआम उस पर गोलियों की बरसात और उसका मर्डर किसी को भी हजम नहीं हो रहा था शक की सुई यहीं पर आकर अटक रही थी कि एक-एक गतिविधि की जानकारी कैसे अपराधियों को कैसे हुई. कोई खुलेआम आकर उसे गोली मारकर कैसे चला गया. छोटे भाई अरविंद शर्मा का पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करना इस केस को पूरी तरह से क्लियर कर चुका है.अरविंद शर्मा के थाने में आत्मसमर्पण करने के बाद अब कई सवाल खड़े हो रहे है कि आखिर क्यों अरविंद शर्मा को अपने ही भाई की हत्या करने की जरूरत पड़ गई.
क्यों अरविंद शर्मा ने बड़े भाई की मौत की साजिश रची
विक्रम शर्मा का छोटा भाई अरविंद शर्मा वही है जिससे विक्रम शर्मा ने ट्रांसपोर्टर अशोक शर्मा की हत्या के बाद उसकी पत्नी से अरविंद शर्मा की शादी करवाई थी.भले ही अरविंद शर्मा से पिंकी शर्मा की शादी हुई थी लेकिन उसके नाम जितनी भी संपत्ति थी उस पर पूरी तरह से विक्रम शर्मा की चलती थी.अरविंद शर्मा केवल नाम के लिए ही संपत्ति का मालिक था.ये बात धीरे-धीरे अरविंद शर्मा के मन में घर कर गई और फिर उसने विक्रम शर्मा को रास्ते से हटाने के लिए ब्लूप्रिंट तैयार करना शुरू किया.और एक दिन अपने ही भाई की जान का दुश्मन बन बैठा.विक्रम शर्मा की हत्या कोई भी ऐरा गैरा नहीं कर सकता था यह बात पुलिस भी जानती है और जिस तरह से उसका रुतबा था वे सभी लोगों को पता था.अखिलेश सिंह, जमशेदपुर अपराध की दुनिया का ऐसा नाम था जिसका चेहरा जिसके नाम से भी करोबारियों और अधिकारियों का पसीना छूट जाता था, विक्रम शर्मा उसी का गुरु था. अपराध की दुनिया का इतना बड़ा चेहरा होने के बाद विक्रम शर्मा तक कोई भी आसानी से नहीं पहुंच सकता था.
जमशेदपुर से जुड़े विक्रम शर्मा की हत्या के सभी तार
भले ही विक्रम शर्मा की हत्या उत्तराखंड के देहरादून में हुई थी लेकिन इसके तार जमशेदपुर से ही जुड़े हुए है. इस बात का सभी को था.आखिर हुआ ऐसा ही क्योंकि जमशेदपुर से देहरादून पुलिस ने 3 आरोपियों को गिरफ़्तार किया है जो एक बागबेड़ा का रहने वाला है तो दूसरा जुगसलाई का.धीरे-धीरे जो तार जुड़ रहे हैं वह जमशेदपुर से जुड़ रहे है.सीसीटीवी में दिखे आरोपी आकाश प्रसाद, आशुतोष कुमार और विशाल शामिल है.अब चलिए हम आपको पारिवारिक विश्वास घात की कहानी की असली पृष्टभूमि से रूबरू करवाते है. और सिल सिलेवार तरीके से कैसे विक्रम शर्मा की हत्या की साजिश को अंजाम दिया गया उसके बारे में बताते है.
काफ़ी सुनियोजित तरीके से रची गई थी हत्या की साजिश
विक्रम शर्मा की हत्या की जो असल कहानी खुलकर सामने आ रही है वह काफी ज्यादा हैरान करने वाली है. रातो रात इतने बड़े गैंगस्टर को कोई मौत के घाट नहीं उतार सकता है.आपको जानकर हैरानी होगी कि साल 2025 के जुलाई महीने से ही जमशेदपुर में विक्रम शर्मा की हत्या की योजना बनाई जा रही थी और इसे अंजाम 2026 में दिया गया.सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक विक्रम शर्मा का छोटा भाई अरविंद शर्मा साल 2025 के जुलाई माह में जमशेदपुर के मानगो पहुंचा था जहां प्रभात से उसकी बातचीत हुई थी और उसने अपने बड़े भाई की हत्या का ब्लूप्रिंट तैयार किया था.
रिश्तो पर भारी पड़ा जमीन
अब तक विक्रम शर्मा हत्याकांड में जो सामने आया है उसके मुताबिक हत्या के पीछे जमशेदपुर के बिस्टुपुर शहर में स्थित बेनामी संपत्ति और देहरादून की संपत्ति है.दरअसल साल 1998 में विक्रम शर्मा ने ट्रांसपोर्टर अशोक शर्मा की हत्या करवाई थी.जिसमे विक्रम शर्मा अरविंद शर्मा, ट्रांसपोर्टर की पत्नी पिंकी शर्मा अखिलेश सिंह और अन्य दो तीन लोगों का नाम सामने आया था.जिनमें से सभी को सबूत के अभाव में बरी कर दिया गया था. ट्रांसपोर्टर के नाम पर करोडों की संपत्ति थी जिस पर अरविंद शर्मा की नजर थी.ट्रांसपोर्टर विक्रम शर्मा का करीबी था.लेकिन फिर भी विक्रम शर्मा ने उसे नहीं छोड़ा और मौत के घाट उतरवा दिया.उसने ट्रांसपोर्टर की हत्या के बाद उसकी पत्नी पिंकी शर्मा से अपने छोटे भाई अरविंद शर्मा की शादी करवा दी थी.जिसके बाद ट्रांसपोर्टर की सारी संपत्ति विक्रम शर्मा के कब्जे में आ गई थी.कुछ दिन तक तो सब कुछ सही चल लेकिन सभी संपत्ति पर विक्रम शर्मा का ही कबजा था जो अरविंद शर्मा को बिल्कुल नागावार था.वह चाहता था कि पूरी संपत्ति पर उसका स्वामित्व हो लेकिन विक्रम शर्मा के रहते ऐसा नहीं हो सकता था.धीरे-धीरे दोनों भाई के रिश्ते के बीच की खाई इतनी गहरी हो गई थी अरविंद शर्मा ने भाई को रास्ते से हटवाने के लिए साजिश रच दी.
आख़िर क्यों दोनों भाई के रिश्ते में बन गई इतनी गहरी खाई
दरअसल जिस ट्रांसपोर्टर की पत्नी पिंकी शर्मा से अरविंद शर्मा की शादी हुई विक्रम शर्मा अपने छोटे भाई को संपत्ति पर कोई भी अधिकार जताने नहीं देता था. वही बिस्टुपुर के कई इलाके में बेनामी संपत्ति पर ही वह अपना एकमात्र स्वामित्व चाहता था.देहरादून की जमीनों और स्टोन क्रशर के कारोबार में हिस्सेदारी को लेकर दोनों भाइयों में ठन गई थी.इसी विवाद को खत्म करने के लिए अरविंद ने 'भाई' को ही रास्ते से हटाने का फैसला किया.इसको अंजाम देने के लिए अरविंद शर्मा ने काफी शातिर शूटरों को विक्रम शर्मा की सुपारी दी और फ्लाइट से जमशेदपुर से उत्तराखंड भेजा.
काफी प्रोफेशनल तरीके से दिया गया हत्या को अंजाम
विक्रम शर्मा की हत्या के बाद जमशेदपुर से कोई तार जुड़े हुए ना मिले और अरविंद शर्मा का नाम इसमे शामिल ना हो इसके लिए उसके लिए काफी प्रोफेशनल तरीके से हत्या की साजिश रची और जमशेदपुर से शूटरों को उत्तराखंड के देहरादून शहर भेजा. वही भाडे पर गाड़ी और बाइक का इस्तेमाल किया गया ताकि किसी को भी कोई शक न हो.वही विक्रम शर्मा की पूरी तरीके से रेकी की गई गई थी कि वह कितने बजे घर से बाहर निकलता है, कितने बजे जिम जाता है और जिम करके कितने बजे निकलता है. यह सभी गतिविधि पर अपराधियों की नज़र थी जैसे ही विक्रम शर्मा जिम करके मॉल से बाहर निकल रहे थे सीधियां पर ही ताबड़तोड़ फायरिंग की गई जिससे मौके पर उनकी मौत हो गई.हलांकि विक्रम शर्मा अपने पास एक लाइसेंसी रिवॉल्वर हमेशा रखा था लेकिन हमला इतने सुनीयोजित और तेजी से हुआ कि रिवॉल्वर निकालने का समय भी नहीं मिला.
गलती से भी ना बचे जान रखा गया पूरा ख्याल
विक्रम शर्मा की गलती से भी जान ना बच जाए इसका पूरा ख्याल रखा गया और तीन गोलियां चलाई गई.जिसमें से दो गोलियां उनके सर में लगी जिसने मौके पर ही उन्हें दम तोड़ दिया.अब तक पुलिस के खुलासों में जो बात सामने आई है उसमे जो 3 शूटर हैं जिन्होंने विक्रम शर्मा को मौत के घाट उतारा उनकी उमर 21 से 25 साल के बीच है.इनका भी कोई आपराधिक रिकार्ड है.
दुनिया के आगे जितने वाला परिवार के सामने हारा
जमशेदपुर में लगभग 1 दशक तक लगतार खून खराबा मचाने के बाद विक्रम शर्मा ने जमशेदपुर छोड़ने का फैसला लिया और उत्तराखंड के देहरादून में सफेदपोश बनकर रहने लगा.आलीशान गाड़िया बांग्ला और महंगा शौक वह सभी वहां पूरा करता था.लेकिन कहां जाता है कि आदमी पूरी दुनिया से जीत सकता है लेकिन परिवार के आगे आकर हर जाता है. विक्रम शर्मा के साथ ही कुछ ऐसा ही हुआ.अब देखने वाली बात होगी कि विक्रम शर्मा की मौत और उसके छोटे भाई का थाने में सरेंडर करने के बाद जेल में बंद अखिलेश सिंह क्या कुछ करता है.
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