जन्माष्टमी-2 : मथुरा और वृंदावन से भी अलग और खास क्यों है बंशीधर नगर का कृष्ण मंदिर , जानिए इतिहास

    जन्माष्टमी-2 :  मथुरा और वृंदावन से भी अलग और खास क्यों है बंशीधर नगर का कृष्ण मंदिर ,  जानिए इतिहास

    गढ़वा ( GARWAH):   भारत में जब कृष्णाष्टमी की बात होती है तो लोगों के जेहन में मथुरा औऱ वृंदावन की तस्वीर उभर कर सामने आती है.  भगवान कृष्ण के दर्शन के लिए भक्त मथुरा और वृंदावन जाना पसंद करते हैं, लेकिन विलक्षण और सबसे अलग भगवान कृष्ण की प्रतिमा देखनी हो तो झारखंड में गढ़वा जिला का रुख़ कीजिए. जहां सालों पूर्व मंदिर में स्थापित है विश्व की इकलौती अद्वितीय बत्तीस मन ठोस सोने की कृष्ण की प्रतिमा. तो आइए आज आप हमारे जरिये करिये अपने आराध्य का दर्शन.  

     दुनिया का एकमात्र अद्वितीय और अनूठा कृष्ण मंदिर

    झारखंड के गढ़वा जिला में एक अनुमंडल है नगर उंटारी, जिसका नाम बदलकर बंशीधर नगर अनुमंडल किया गया है. जहां बंशीधर मंदिर में स्थापित है भगवान् कृष्ण की अद्वितीय, अलौकिक और नयनाभिराम प्रतिमा.  कहा जाता है कि देश ही नहीं वरन पूरे विश्व में अकेली ऐसी प्रतिमा है जो 32 मन ठोस सोने की है. किंवदंती के अनुसार आज से तक़रीबन दो सौ साल पहले नगर उंटारी की राजमाता शिवमानी कुवंर को आये स्वप्न के आधार पर पहाड़ पर खुदाई करायी गयी , जहां उक्त प्रतिमा मिली.  कहा जाता है कि राजमाता उस प्रतिमा को अपने महल में स्थापित करना चाहती थीं, पर वर्तमान में जहां मंदिर है वहीं पर वह हाथी बैठ गया, जो 25 किलोमीटर दूर पहाड़ से ले कर प्रतिमा आ रहा था. इसलिए प्रतिमा वहीं स्थापित करनी पड़ी.  21 जनवरी 1828 को वसंत पंचमी के दिन उक्त प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की गयी. कहा जाता है कि बंशीधर मंदिर में स्थापित उक्त प्रतिमा की अलौकिकता की व्याख्या राहुल सांकृत्यायन ने भी की है. अपनी यात्रा के दौरान कालांतर में नगर उंटारी पहुंचे. राहुल सांकृत्यायन ने मंदिर में कुछ समय गुज़ारा था. उन्होंने भी उक्त प्रतिमा को विश्व का अपने आप में अकेला अद्वितीय और अनूठा बताया था। मंदिर की महत्ता के बारे में अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोगों की दिनचर्या की शुरुआत भगवान कृष्ण के दर्शन के साथ होती है. जन्माष्टमी महोत्सव में मंदिर की भव्यता देखते बनती है. 

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    ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों रूप में 

    बंशीधर मंदिर जहां एक तरफ़ सालों से लोगों के लिए श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है वहीं इसे विश्व फ़लक पर स्थापित करने के उद्देश्य से सरकार भी अनवरत प्रयासरत है. भगवान् बंशीधर से लोगों की अगाध श्रद्धा जुड़ी हुई है.  यह एक ऐसा मंदिर है. जहां प्रतिमा की स्थापना पहले हुई और मंदिर उसके बाद बना. प्रतिमा को गौर से देखने पर पता चलता है कि शेष नाग के फन पर कमल दल है और कमल दल पर बंशीधर विराजमान है. इतना ही बंशीधर के सिर पर जटा भी है. कहा जा सकता है कि यह ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों रूप में है.

    नक्सलियों ने मूर्ति चोरी करने की बनायी थी योजना

     32 मन सोने की प्रतिमा होने के बाबजूद कुछ वर्ष पूर्व तक सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं थी. किंवदंती है कि दशकों पूर्व चोरी की नीयत से एक व्यक्ति मंदिर में प्रवेश किया था जो अंधा हो गया था.  लगभग 7 वर्ष पूर्व बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के नामचीन गैंगस्टर द्वारा नक्सली के साथ मिलकर मंदिर से प्रतिमा चुराने की योजना बनी थी. यूपी एटीएस को यह सूचना मिली थी. उसके बाद झारखंड पुलिस के सहयोग से नक्सली की गिरफ्तारी हुई जो आज भी गढ़वा जेल में बंद है. योजना थी कि मंदिर पर बम गिराकर हेलीकाप्टर से प्रतिमा को अपलिफ्ट कर ले जाने की. लेकिन यह योजना विफल हो गयी. तब से मंदिर की सुरक्षा में जवान को तैनात किया गया है.

    नगर उटांरी का नाम बदल कर वंशीधर नगर रखा 

    पूर्ववर्ती सरकार द्वारा नगर उंटारी का नाम बदलकर बंशीधर नगर किया गया. कृष्ण जन्मोत्सव को राजकीय महोत्सव का दर्जा मिला. दो वर्षों से कोरोना के कारण सादगी पूर्वक कृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया. लेकिन इस वर्ष वृहद पैमाने पर कृष्णाष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा है. जरूरत है इस स्थल को और अधिक विकसित करने की. प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में विकसित होने पर पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोग स्वरोजगार से जुड़ पाएंगे ताकि उनकी आर्थिक उन्नत्ति हो सके.

    रिपोर्ट - पंचम झा, दुमका. 

     


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