कोयलांचल विश्वविद्यालय को फंड  के अभाव में रहेगा शिफ्टिंग का इंतजार, जानिए क्या है पूरा मामला 

    कोयलांचल विश्वविद्यालय को फंड  के अभाव में रहेगा शिफ्टिंग का इंतजार, जानिए क्या है पूरा मामला

    धनबाद(DHANBAD) : बहुत लंबे संघर्ष के बाद धनबाद को बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय मिला. रघुवर दास की सरकार ने धनबाद विधायक राज सिन्हा की पहल पर धनबाद को यह तोहफा दिया. लेकिन आगे सरकारों को काम में  इसमें तेजी दिखानी चाहिए थी, वह दिख नहीं रही है. विश्वविद्यालय के लिए धनबाद के भेलाटांड़ में भवन बनकर तैयार है. सोमवार को कैंपस के 4 भवनों को विश्वविद्यालय प्रबंधन ने हैंडोवर लिया.  इन 4 भवनों में प्रशासनिक, शैक्षणिक, सेंट्रल लाइब्रेरी, वी सी आवास शामिल है. लेकिन हैंड ओवर की प्रक्रिया अभी लगता है कि लंबित ही रहेगी, क्योंकि इसके लिए विश्वविद्यालय को फंड का इंतजार है. विश्वविद्यालय ने शिफ्टिंग के लिए ₹35करोड़  की मांग की है.  

    शिफ्टिंग के लिए पहले चरण में मिलने हैं 4.87 करोड़

    पहले चरण में 4.87 करोड़  मिलने हैं लेकिन अभी तक मुख्यालय से राशि नहीं मिली है.  इस वजह से बेंच -डेस्क समेत अन्य सामग्रियों की खरीदारी नहीं हो पा रही है. मुख्य सड़क से विश्वविद्यालय परिसर तक सड़क भी नहीं बनी है. देखना होगा कि इसे पूरा होने में कितने दिन और लगते है.  वैसे, विश्वविद्यालय मिलना धनबाद के लिए बड़ी बात है. विनोबा भावे विश्वविद्यालय बनने के पहले धनबाद रांची विश्वविद्यालय के अंतर्गत आता था. उसके बाद विनोबा भावे विश्वविद्यालय. हजारीबाग के अधीन हो गया. धनबाद में जब विनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय की घोषणा हुई तो यह विनोबा भावे विश्वविद्यालय से अलग हो गया.  
     
    फिलहाल लुबी सर्कुलर रोड में चलता है ऑफिस 
     
    फिलहाल लुबी सर्कुलर रोड स्थित एक भवन में विश्वविद्यालय का कार्यालय चल रहा है लेकिन नई बिल्डिंग जो बनी है, वह काफी सुसज्जित है, भवन की डिजाइन भी बेहतर है, परिसर भी बड़ा है.  भवन को मेंटेन करना भी आगे चलकर विश्वविद्यालय प्रबंधन के लिए समस्या हो सकती है. धनबाद वैसे तो धनबाद कई तरह की सुविधाओं से वंचित है लेकिन यूनिवर्सिटी हप जाने से अब यहां के छात्रों को बड़ी राहत मिल सकती है. पढ़ाई करने के लिए उन्हें बाहर नहीं जाना पड़ेगा, साथ ही अन्य किसी परेशानी के लिए वह तुरंत विश्वविद्यालय से संपर्क कर सकते है. लेकिन फिर वही सवाल है कि विश्वविद्यालय पूरी तरह से कब तक शिफ्ट  होगा और  कब तक काम सुचारू हो पाएगा.

     रिपोर्ट: सत्यभूषण सिंह, धनबाद 



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