KATRAS: ट्रेन परिचालन पर सबके अपने-अपने बोल, जानिए क्या है मामला 

    KATRAS: ट्रेन परिचालन पर सबके अपने-अपने बोल, जानिए क्या है मामला 

    धनबाद(DHANBAD) : अंग्रेजों के जमाने का कतरासगढ़  स्टेशन बुधवार को खूब सजा था.  यह सजावट रात भर में ही कर ली गई थी.  आखिर स्टेशन की सजावट हो भी क्यों नहीं, बुधवार को कतरास स्टेशन पर धनबाद इंटरसिटी का स्टॉपेज जो शुरू होने था.  गिरिडीह के सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी और बाघमारा के भाजपा विधायक ढुल्लू महतो ने हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को कतरासगढ़  से रवाना किया. देखने में तो यह बहुत सामान्य कार्यक्रम दिखा लेकिन इसके पीछे कई कहानियां और राजनीति छिपी हुई है. 20 महीने तक आंदोलन करने वाले आंदोलनकारी आज इस कार्यक्रम में नहीं दिखे. अलबत्ता मंगलवार को ही आंदोलनकारी झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक मथुरा महतो के साथ स्टेशन पहुंचे थे. वह लोग  इंटरसिटी ट्रेन के लिए टिकट हासिल किये.  मथुरा महतो मंगलवार को क्यों गए और बुधवार को सांसद और विधायक ने हरी झंडी क्यों दिखाई ,इसको लेकर कोयलांचल में बहस छिड़ गई है.  सबके अपने-अपने तर्क हैं और अपने-अपने दावे है.  सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी ने घोषणा की कि बंद अन्य ट्रेनों को भी चालू कराने की वह पूरी कोशिश करेंगे.  वहीं ढुल्लू महतो ने कहा कि सांसद और मेरे अथक प्रयास से आज यह सफलता मिली है. 

    अहिंसक आंदोलन की बहुत बड़ी जीत 
     
    इधर, इस आंदोलनकारी के अगुआ समाजसेवी विजय झा ने कहा है कि धनबाद चंद्रपुरा रेल लाइन पर ट्रेनों का चलना अहिंसक आंदोलन की बहुत बड़ी जीत है.  आज के कार्यक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए दिलीप दसौंधी  ने कहां है कि आज जो माला पहन रहे हैं, वह आंदोलन के समय कहीं दिखे नहीं थे.  आंदोलन की शुरुआत वार्ड पार्षद विनोद गोस्वामी ने की.  उसके बाद इस आंदोलन में पूर्व मंत्री ओ पी लाल (अब  स्वर्गीय) समाजसेवी विजय झा, कांग्रेस नेता अशोक लाल, राजेंद्र प्रसाद राजा सहित अन्य जुड़ते गए और यह आंदोलन बड़ा आकार ले लिया.  उस समय आंदोलन को समर्थन देने न सांसद पहुंचे थे और न विधायक, लेकिन आज जब सफलता मिली तो माला पहने के लिए सभी पहुंच गए. 

    15 जून 2017 से लेकर 25 फरवरी 2019 तक परिचालन बंद था
     
    आपको बता दें कि 15 जून 2017 से लेकर 25 फरवरी 2019 तक इस लाइन पर ट्रेनों का परिचालन बंद था.  कोयलांचल के इतिहास में पहला अहिंसक आंदोलन था, जिसे जीत मिली और ट्रेनें फिर चालू हुई.  बता दें कि 2017 में रेलवे मंत्रालय ने एकाएक 52 ट्रेनों का परिचालन रद्द कर दिया था.  कारण बताया  गया कि भूमिगत आग है ,इसलिए ट्रेनें चलने में खतरा है.   उसके बाद तो यह राष्ट्रीय मुद्दा बन गया.  लोग कहने लगे कि पीएमओ की मुहर लग गई है , इसलिए ट्रेनें नहीं चल सकती  लेकिन मानना होगा आंदोलनकारियों के जज्बे और धैर्य को, लड़ाई जारी रखी  और उन्हें सफलता भी मिली.

    रिपोर्ट : शांभवी, धनबाद


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