बिहार की काराकाट LS सीट : एनडीए और पवन सिंह की हो रही कड़ी परीक्षा, पढ़िए  

    बिहार की काराकाट LS सीट : एनडीए और पवन सिंह की हो रही कड़ी परीक्षा, पढ़िए  

    धनबाद(DHANBAD): बिहार की काराकाट लोक सभा सीट अचानक सुर्खियों में है.  एनडीए के लिए यह सीट  प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी हुई है तो भोजपुरी पावर स्टार पवन सिंह के लिए भी राजनीति की परीक्षा होगी.  2009 में परिसीमन के बाद काराकाट लोक सभा सीट बनी थी.  आंकड़ों के मुताबिक  काराकाट  सीट पर यादव वोटरों की संख्या लगभग 3 लाख है.  कुर्मी और कोयरी  वोटर  लगभग ढाई लाख है. जबकि मुस्लिम मतदाता डेढ़ लाख के आसपास है.  काराकाट  में राजपूत जाति के मतदाता भी ढाई लाख के करीब है.  ब्राह्मण लगभग 75000 हैं वहीं भूमिहार 50000 के आसपास है.  बाकी दलित और दूसरी जातियों के वोटर है.  काराकाट लोक सभा सीट की विशेषता यह है कि एनडीए  के उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा को भी सवर्ण  जाति के वोटरों पर भरोसा है तो पवन सिंह को भी इन्हीं जातियों के वोटरों  पर भरोसा है.

    सभी के पास अपना -अपना गुना भाग 
     
    सीपीआई एम एल के  राजा राम सिंह कुशवाहा को पार्टी कैडर के अलावा राजद के कोर  वोटर  से उम्मीद है.  काराकाट  लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत  6 विधानसभा सीटें  है.  इसमें रोहतास जिले की नोखा, डेहरी, काराकाट और औरंगाबाद जिले की गोह ,ओबरा  और नवी  नगर शामिल है.  2020 के विधानसभा चुनाव में पांच सीट पर राजद जीत दर्ज की जबकि एक सीट पर सीपीआई एम एल विजई रही.  पवन सिंह की एंट्री से इस सीट पर उपेंद्र कुशवाहा की चिंता बढ़ गई है.  पवन सिंह को पहले भाजपा ने धनबाद से सटे  आसनसोल लोकसभा सीट से टिकट दिया था.  पवन सिंह ने इसे स्वीकार भी कर लिया था, लेकिन दूसरे ही दिन चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया.  लेकिन यह जरूर कहा कि उन्होंने ठान ली है कि चुनाव लड़ेंगे, लेकिन कहां से लड़ेंगे, इसकी घोषणा उन्होंने बहुत बाद में की.  

    इन जगहों से पवन सिंह मांग रहे थे टिकट 

    सूत्रों के अनुसार आरा  के रहने वाले पवन सिंह पार्टी से आरा  या फिर महाराजगंज से टिकट मांग रहे थे. भाजपा ने आरा से आरके सिंह और महाराजगंज से जनार्दन सिग्रीवाल को दोबारा टिकट दिया है.  यह  बाद भी सच है कि भोजपुरी फिल्मों के स्टार होने के कारण पवन सिंह की लोकप्रियता है.  लेकिन यह लोकप्रियता वोट में कितनी बदलेगी यह  तो 4 जून को ही पता चलेगा.  लेकिन पवन सिंह की रैली में भारी भीड़ जुट  रही है, लोग नारेबाजी कर रहे है.  दूसरी ओर उपेंद्र कुशवाहा के लिए और एनडीए के लिए यह  सीट  चुनौती बन गई है.  या अलग बात है कि भोजपुरी फिल्मों के कई स्टार का झुकाव राजनीति की ओर हुआ है.  अब देखना है कि 2009 में बने इस लोकसभा सीट पर 4 जून को क्या परिणाम निकलता है.

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो  


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