छात्र नेता से लेकर लोकसभा चुनाव लड़ने तक का सफर, पढ़ें प्रदीप यादव की करियर की कहानी

    छात्र नेता से लेकर लोकसभा चुनाव लड़ने तक का सफर, पढ़ें प्रदीप यादव की करियर की कहानी

    छात्र नेता से लेकर लोकसभा चुनाव लड़ने तक का सफर, पढ़ें प्रदीप यादव की करियर की कहानी

    देवघर(DEOGHAR):16 जनवरी 1966 को प्रदीप यादव का जन्म हुआ है.प्रदीप का गांव तत्कालीन बिहार अब झारखंड के गोड्डा जिला के पोड़ैयाहाट प्रखंड का बोहरा है.गोड्डा कॉलेज से केमिस्ट्री विषय से स्नातक करने वाले प्रदीप यादव का राजनीतिक कैरियर की शुरुआत 1980 से 90 के दशक में छात्र नेता से हुई.धीरे धीरे इनकी ख्याति बढ़ती गयी.1995 में बीजेपी ने इन्हें पोड़ैयाहाट विधानसभा से चुनावी मैदान में उतारा था, तब लगभग 22 हज़ार वोटों से वह चुनाव झामुमो पार्टी के प्रत्याशी प्रशांत मंडल से हार गए थे.2000 के चुनाव में जीत हासिल कर वह बिहार विधानसभा के सदस्य बने. 

    वनांचल आंदोलन में भी प्रदीप की रही है भूमिका

     झारखंड राज्य बिहार से अलग करने के लिए जहां एक ओर झारखंड आंदोलनकारी अपना आंदोलन चला रहे थे, वहीं दूसरी ओर वनांचल आंदोलन भी चल रहा था.प्रदीप की बड़ी भूमिका इस आंदोलन में रही थी.आखिरकार 15 नवंबर 2000 को बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य की स्थापना हुई.तब पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी बने थे.बाबूलाल सरकार में प्रदीप यादव ग्रामीण विकास मंत्री बने।बाबूलाल मरांडी अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा नही कर सके.एक नीति को लागू करने का झारखंड में जब पुरजोर विरोध शुरू हुआ तो बाबूलाल मरांडी की जगह पर अर्जुन मुंडा की सरकार बनी तब प्रदीप यादव शिक्षा मंत्री बने. 

    2019 का लोकसभा चुनाव प्रदीप यादव ने जेवीएम के टिकट से लड़ा

     2002 में गोड्डा लोकसभा के सांसद जगदम्बी प्रसाद यादव के निधन के बाद उपचुनाव में बीजेपी के टिकट से जीत कर  सांसद बने.फिर 2005 के लोकसभा चुनाव में वह कांग्रेस प्रत्याशी फुरकान अंसारी से हार गए.2007 में बाबूलाल मरांडी ने झारखंड विकास मोर्चा पार्टी का गठन किया.2009 में प्रदीप यादव जेवीएम के टिकट से पोड़ैयाहाट विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा जो अभी तक यही से विधायक है.2019 लोकसभा चुनाव में प्रदीप यादव जेवीएम के टिकट से चुनाव लड़े जिसमे बीजेपी के निशिकांत दुबे से हार का सामना करना पड़ा.2020 में जेवीएम पार्टी के समाप्त होने के बाद प्रदीप ने कांग्रेस का दामन थामा.पोड़ैयाहाट के विधायक रहते हुए वे इस बार गोड्डा लोकसभा से कॉंग्रेस के प्रत्याशी है. 

    जेल भी जा चुके है इस मामले में प्रदीप

     गोड्डा में अडानी पावर प्लांट के लिए 2017 में जमीन अधिग्रहण किया जा रहा था.तब इसके विरोध में प्रदीप यादव ने स्थानीयों के साथ मिलकर आंदोलन शुरू किया.इसी आंदोलन के लिए उन्हें जेल भेज दिया गया.फिर हाई कोर्ट ने उन्हें बेल दिया.2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान जेवीएम नेत्री द्वारा छेड़खानी का मामला दर्ज कराया गया था, यह मामला अभी भी न्यायालय में लंबित है.2022 में प्रदीप यादव के गोड्डा सहित अन्य ठिकानों पर आयकर विभाग का छापा भी मारा गया था इसके कुछ महीनों बाद ईडी ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी. 

     रिपोर्ट-रितुराज सिन्हा 


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