झारखंड  की राजनीति -हेमंत सोरेन भाजपा की  ओबीसी पॉलिटिक्स में कैसे लगा रहे पलीता!

    झारखंड  की राजनीति -हेमंत सोरेन भाजपा की  ओबीसी पॉलिटिक्स में कैसे लगा रहे पलीता!

    धनबाद(DHANBAD) : झारखंड में भाजपा आदिवासी के साथ-साथ ओबीसी जमात  की राजनीति शुरू कर दी है. शहर में भी पैठ बढ़ाने की कोशिश हो रही है.  भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी कोटे के बनाए गए हैं, तो नेता प्रतिपक्ष आदिवासी हैं.  बीजेपी आगे की सोच कर रणनीति तैयार कर रही है, तो भाजपा की रणनीति को समझ कर झारखंड मुक्ति मोर्चा उसके आगे की राजनीति शुरू कर दी  है.  मतलब आदिवासी तो झामुमो के साथ हैं  ही ,अब ओबीसी को भी अपने पाले में करने की तरकीब शुरू कर दी है.  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने धनबाद में जो संकेत दिए, उससे  ऐसा लगता है कि अब शहरी वोटर  पर भी झामुमो  कब्जा करने की कोशिश करेगा। 

    सीएम का एलान -गांव भी हमारा और शहर भी हमारा है
     
    मुख्यमंत्री ने धनबाद में ऐलानिया  लहजे में कहा था कि गांव भी हमारा और शहर भी हमारा है.  मतलब उन्होंने बाहरी - भीतरी की बातों को दरकिनार करते हुए शहरी लोगों को भी झामुमो पर भरोसा करने की अपील की.  अगड़ी  जाति और ओबीसी को बीजेपी का पारंपरिक वोट बैंक माना जाता रहा है.  फिलहाल भाजपा की जीत में ओबीसी और महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है.  झारखंड में भी भाजपा इसी राह पर चल पड़ी है.  लेकिन झामुमो  सचेत है और वह भाजपा के हर चाल को काटने की कोशिश में है.  निगम चुनाव में भी झामुमो शहरी  वोटो को अपने पक्ष में करने की लगातार कोशिश कर रहा है.  कोडरमा में गुरुवार को मुख्यमंत्री ने पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष शालिनी गुप्ता को पार्टी में शामिल कराया।  उन्होंने कोडरमा में कहा कि कोडरमा जिले को सरकार अब तक मात्र दो आंखों से देख रही थी. 

    पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष शालिनी गुप्ता आई झामुमो के साथ 
     
    मगर अब शालिनी गुप्ता के झामुमो  में आ जाने से सरकार को  दो आंखें और मिल गई.  कोडरमा का विकास और तेजी से होगा।  मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि चतरा में बहुत बड़ा अंबेडकर विश्वविद्यालय खोला जाएगा।  मतलब की नजर शहरी  वोटर  पर  है,चाहे वह कोई भी हो.  अगर धनबाद की बात कर ली जाए तो भाजपा से नाराज हुए पूर्व मेयर  शेखर अग्रवाल को झामुमो ने अपने पाले  में कर लिया और वह झामुमो  समर्थित  उम्मीदवार बन गए हैं.  मतलब जहां झामुमो  की नजर अब ओबीसी के साथ-साथ शहरी  वोटर  पर भी है.  वैसे भी, भाजपा को शहरी इलाकों में अधिक समर्थन मिलता रहा है.  इसके काट  के लिए झामुमो अब नई चाल चलना  शुरू कर दिया है.  नगर निगम चुनाव सिर  पर है.  देखना है झामुमो की नई चाल का कितना असर निगम चुनाव परिणाम पर दिखता है.

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो


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