पुलिस अभिरक्षा में कारोबारी की मौत के बाद सवालों से घिरी झारखण्ड पुलिस, उठ रहे हैं कई सवाल

    पुलिस अभिरक्षा में कारोबारी की मौत के बाद सवालों से घिरी झारखण्ड पुलिस, उठ रहे हैं कई सवाल

    धनबाद(DHANBAD): झारखंड के हजारीबाग में कारोबारी सुनील गुप्ता की पुलिस अभिरक्षा में मौत को लेकर हंगामा मचा हुआ है. पुलिस लोगो के निशाने पर है. विधायक मनीष जायसवाल हमलावर है. हर कदम पर पीड़ित परिवार के साथ खड़े दिख रहे हैं. रविवार को विधायक मनीष जयसवाल भी मृतक के घर पहुंचे. घटनाक्रम की पूरी जानकारी लेने के बाद मृतक के परिजनों के साथ सदर थाना पहुंच गए. व्यवसाई की मौत पर विधायक ने कई सवाल उठाए, पूछा कि जब वह पुलिस हिरासत में थे तो उनकी मौत कैसे हुई. विधायक मनीष जायसवाल ने थाने में मौजूद डीएसपी से कहा कि हम लोग इस मामले में उम्मीद कर रहे थे कि पुलिस दूध का दूध और पानी का पानी करेगी और दोषियों पर कार्रवाई करेगी, लेकिन यहां तो मामला कुछ अलग ही है.

    आरोप-दोषियों को बचा रही है पुलिस

    पुलिस मृतक के परिवार के पहले ही किसी अन्य से आवेदन लेकर दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है.  विधायक के दबाव के बाद पत्नी के आवेदन पर व्यवसाई को पकड़ने गई पुलिस टीम में शामिल पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाते हुए हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है. पत्नी ने भी थाने पहुंच कर पुलिस वालों से कहा कि जब आप मेरे सामने मेरे पति को ले गए तो वह स्वस्थ थे. अचानक उनकी मौत कैसे हो गई. उन्होंने कहा कि मेरे पति को लौटा सकते हैं क्या. यह पूरा मामला एक ट्रक डिटरजेन्ट की चोरी से जुड़ा हुआ है. चोरी के आरोप में पुलिस सुनील गुप्ता को पकड़ कर ले गई थी. पुलिस अभिरक्षा में उनकी मौत हो गई. पुलिस की पिटाई से मौत का आरोप है. बहरहाल इस घटना को लेकर राजनीति तेज हो गई है.

    बाबूलाल मरांडी भी हुए हमलावर

    भाजपा विधायक दल के नेता पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में पुलिस की कार्यशैली पर राज्य सरकार को घेरा है. हजारीबाग के व्यवसाई की मौत मामले में राज्य के डीजीपी से भी बात की है. उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. साथ ही कहा है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग इस मामले का संज्ञान ले. अभी हाल ही में बाबूलाल मरांडी ने धनबाद में कहा था कि धनबाद लगता है कि अपराधियों की नगरी बन गई है. रोज कहीं ना कहीं गोली-बम चल रहा है. बहरहाल हजारीबाग की घटना को लेकर पूरे प्रदेश के कारोबारियों में उबाल है. देखना है कि सिर्फ दो अधिकारियों को निलंबित भर ही किया जाता है या फिर मुकदमा दर्ज होने के बाद उनकी गिरफ्तारी होती है या फिर इसकी निष्पक्ष जांच के लिए मामले को किसी स्वतंत्र एजेंसी को हैंडओवर किया जाता है. मनोज रतन चोथे अभी हज़ारीबाग़ के एसपी है.

    रिपोर्ट: शाम्भवी के साथ संतोष  

     


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