झारखंड जनाधिकार महासभा ने योगी सरकार को ठहराया महाकुंभ मौतों का जिम्मेदार, कहा- आंकड़ों को छिपाने में लगी रही यूपी सरकार

    झारखंड जनाधिकार महासभा ने योगी सरकार को ठहराया महाकुंभ मौतों का जिम्मेदार, कहा- आंकड़ों को छिपाने में लगी रही यूपी सरकार

    रांची(RANCHI): उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में भगदड़ मचने से हुई मौतों पर झारखंड जनाधिकार महासभा ने योगी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. महासभा ने अपनी संवेदना व्यक्त कर हुए कहा कि ये मौतें टाली जा सकती थीं. ये हादसा सरकारी और प्रशासनिक कुप्रबंधन और चूकों के कारण हुई हैं. इस प्रशासन-जनित हादसे की जिम्मेवारी तय होनी चाहिए और इस कांड के दोषी लोगों को सजा मिलनी चाहिए. महासभा का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके प्रशासनिक अधिकारियों ने इस आपदा के बारे में अपनी न्यूनतम जिम्मेवारी का भी निर्वाह नहीं किया. ऐसे हादसों के प्रति पिछली सरकारों की जो भूमिका रहती थी उतनी भूमिका भी नहीं निभाई.

    इस दौरान झारखंड जनाधिकार महासभा ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता से गड़बड़ियों की सच्चाई छुपाना भाजपा सरकारों की एक विशिष्ठता है. योगी सरकार भी महाकुंभ में हुई मौत के आंकड़ों को छिपाने और लाशों को ठिकाने लगाने में ही लगी रही. अभी तक मौत या गुमशुदगी के आंकड़ों को आधिकारिक और नाम के साथ जारी न करना अमानुषिक अक्षमता का खुला प्रमाण है. अख़बारों में तो खबरें आ रही हैं कि लोग भूखे रहकर, मीलों मील पैदल चलकर बदहाल घर पहुंच रहे हैं.

    योगी सरकार राह चलते बदहाल कुंभयात्रियों को कुछ विशेष  गाड़ियों से ससम्मान घर तक नहीं भेज सकी. उनके लिए भोजन-पानी का इंतजाम नहीं कर सकी. दिनदहाड़े लोगों के घर तोड़ने वाले बुलडोजर लुके-छिपे लाशें ठिकाने लगाने में लगे रहे. यह हादसा सुपर वीआईपियों के सुपर इंतजाम में सारा ध्यान लगाने और आम भक्तों को भगवान भरोसे छोड़ देने का नतीजा है. ये सरकारें तो हिन्दुओं की भी विरोधी हैं. यह सच अब भक्तजनों को भी समझना चाहिए.

    अनेक भाजपाई नेता और कार्यकर्ता कुंभ के मौतों को स्वाभाविक बता रहे हैं. उनका कहना है कि इतनी बड़ी भीड़ को नियंत्रित करना आसान थोड़े ही है. कुछ तो इन मौतों को मोक्षों के रूप में पेश कर रहे हैं. इससे बड़ी घिनौनी, बेशर्म और अमानवीय बात नहीं हो सकती. क्या वे भी ऐसा ही मोक्ष चाहते हैं? इस देश में कुंभ का मेला व अन्य धर्मों के व्यापक व ऐतिहासिक अनुष्ठान सदियों से होते आया है.

    लेकिन इस बार महाकुंभ ने योगी सरकार व मोदी सरकार की धर्म-विशेष चेहरे को फिर से बेनकाब कर दिया है. धर्म के मानवता की मूल भावना से हटकर धर्म को साम्प्रदायिकता का हथियार बनाना आम बात हो गयी है. सरकार व भाजपा नेताओं के रवैया से ऐसा प्रतीत होता है कि लोकतंत्र के मूल्यों को भुलाकर देश को हिन्दू धर्मगुरुओं के हवाले कर दिया गया है. मुख्यधारा मीडिया भी इसी खेल का हिस्सा बनी हुई है.

    भगदड़ के बाद भूखे-प्यासे भटकते श्रद्धालुओं को इलाहाबाद के मुस्लिम और सिख समाज के लोगों द्वारा आश्रय सहित तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने की हम सराहना करते हैं. देश के इस आपसी बंधुत्व और मानवता के इतिहास को ही भाजपा खत्म करने पर तुली हुई है.  

    झारखंड जनाधिकार महासभा आम नागरिकों व अपने धर्म में आस्था रखने वाले तमाम लोगों से अपील करती है कि वे धर्म का राजनीतिक उपयोग करने वाली योगी सरकार से इस हादसे का हिसाब मांगें, दोषियों के लिए सजा मांगें और धार्मिक राजनीति करने वाले इन पाखंडी, कुर्सीबाज, जनविरोधी, जीवनविरोधी नेताओं को नकार दें.  मानवीय राजनीति, मानवीय धर्म और लोकतांत्रिक मूल्यों की दिशा चुनें.

     


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