jharkhand Congress: संगठन को मजबूत करने के लिए यह भी करने जा रहा केंद्रीय नेतृत्व !

    jharkhand Congress: संगठन को मजबूत करने के लिए यह भी करने जा रहा केंद्रीय नेतृत्व !

    धनबाद (DHANBAD) : झारखंड में जमीन तलाश रही कांग्रेस नए-नए प्रयोग कर रही है. पैराशूट नेताओं से किनारा करने और जमीनी कार्यकर्ताओं को अधिक अधिकार देने का काम तेज हो गया है. केंद्रीय नेतृत्व झारखंड पर विशेष नजर बनाये हुए है. बिहार चुनाव भी इसका कारण हो सकता है.  संगठन सृजन कार्यक्रम के बाद अब नाराज कांग्रेसियों को फिर से पार्टी में वापस लाने की कोशिश शुरू हो गई है. सूची  में कई पूर्व विधायक भी है. नाराज कांग्रेस नेताओं को उनके कद और काठी के अनुसार जिम्मेवारी देने की भी तैयारी है.  बता दें कि संगठन सृजन कार्यक्रम के तहत पर्यवेक्षकों ने झारखंड के सभी जिलों में रायशुमारी  कर ली है.  और रिपोर्ट भी केंद्रीय नेतृत्व को भेज दी गई है.  

    कांग्रेस महासचिव के सी बेनुगोपाल की है सीधी नजर 

    यह रिपोर्ट सीधे कांग्रेस महासचिव के सी बेनुगोपाल को भेजी गई है और झारखंड के किस जिले में कौन अध्यक्ष रहेगा, इसका निर्णय अब केंद्रीय नेतृत्व करेगा.  यह अलग बात है कि इसमें झारखंड के कांग्रेस प्रभारी के राजू की भी भूमिका होगी.  सूत्र बताते हैं कि कई बड़े नेता फिर से पार्टी में वापस होने की इच्छा जताई है.  सूत्रों के अनुसार पार्टी को मजबूत करने की मंशा से अब नाराज को मनाने का कार्यक्रम चलेगा.  खासतौर पर उन लोगों को पार्टी में लाने की तैयारी है, जो नाराजगी के बावजूद दूसरे दलों में नहीं जाकर अपने क्षेत्र में सक्रिय है. हो सकता है कि इसके बाद दल बदलने वालों के लिए भी मुहिम  चलाई जाए.  पार्टी छोड़कर गए कई नेताओं की ने वापसी के लिए भी आवेदन कर रखा  है. हो सकता है कि  उनके आवेदन पर भी विचार हो. 

    पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला भी लौट सकते है पार्टी में 
     
    सूत्र बताते हैं कि पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला ने भी पार्टी में लौटने की इच्छा जताई है. इसके अलावे कई जिलों के जिला अध्यक्ष भी है. यह बात भी सूत्र बताते हैं कि दुर्गा पूजा के बाद कांग्रेस नए ढंग से झारखंड में कार्यक्रम शुरू करेगी. यह अलग बात है कि बिहार में भी इस साल चुनाव है और झारखंड के कई ऐसे कांग्रेस के नेता हैं, जो अभी भी अपने बिहार  से जुड़े हुए है.  हो सकता है कि कांग्रेस ऐसे नेताओं को बिहार में कुछ जिम्मेवारी दे. वैसे, झारखंड में कांग्रेस संगठन के आमूल चूल परिवर्तन की ओर केंद्रीय नेतृत्व बढ़ चला है. इतना तो तय है कि अब पैराशूट नेताओं कि नहीं चलेगी, जमीन पर और कार्यकर्ताओं के बीच रहने वाले नेताओं को जगह  मिलेगी.

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो  


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