"आदिवासी-ओबीसी" में फंसी झारखंड भाजपा, अब संगठन को छोटा कर झामुमो को टक्कर देने की तैयारी में, पढ़िए क्या है प्लानिंग !

    "आदिवासी-ओबीसी" में फंसी झारखंड भाजपा, अब संगठन को छोटा कर झामुमो को टक्कर देने की तैयारी में, पढ़िए क्या है प्लानिंग !

    धनबाद (DHANBAD) : झारखंड में अपनी "जमीन" तलाश रही भाजपा अब संगठन में अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के नई सोच के साथ मैदान में उतरने जा रही है. प्रदेश के कई जिलों के भाजपा संगठन को टुकड़े में बांटने की तैयारी चल रही है. धनबाद भाजपा तो पहले से ही महानगर और ग्रामीण में बांट दी गई है. लेकिन पुष्ट सूचना के मुताबिक गिरिडीह में भी भाजपा को अब ग्रामीण और महानगर में बांटा जाएगा. इसका मकसद यह बताया जा रहा है कि आधी से अधिक युवा लोगों को पार्टी से जोड़ा जाए. इसके अलावा यह भी जानकारी मिली है कि 80 से अधिक बूथ वाले मंडल को भी दो भागों में बांट दिया जाएगा. इससे अधिक से अधिक लोगों को पार्टी से जोड़े जाने में सहूलियत होगी.

    नए मंडल के गठन की मिल गई है मंजूरी 
     
    सूत्र बताते हैं कि प्रदेश नेतृत्व में नए मंडलों के गठन की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है. संगठनात्मक चुनाव के तहत ही नई सूची जारी कर दी जाएगी. सूत्र बताते हैं कि नए मंडल के अध्यक्षों की घोषणा बहुत जल्द हो सकती है. रायशुमारी की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है. जल्द नए एवं पुराने मंडलों के अध्यक्षों की सूची जारी हो जाएगी. मंडल अध्यक्षों की घोषणा के बाद जिला अध्यक्षों की घोषणा होगी. इसकी भी प्रक्रिया चल रही है. नए अध्यक्षों के लिए लॉबिंग तेज हो गई है. सब जिला अध्यक्ष बनने के कोशिश में लगे हुए हैं. कोई रांची की दौड़ लगा रहा है तो प्रदेश स्तर के नेता जो भी उनके इलाके में आते हैं, उनसे मिल अपनी उपलब्धि बता रहे हैं. वैसे भी झारखंड में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी "म्यूजिकल चेयर" बन गई है. प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के बाद उम्मीद की जा रही थी की बहुत जल्द नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा कर दी जाएगी. 

    जिला स्तर के नेता भी अचरज में कि कहां फंस रहा पेंच 

    लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं. कहां पेंच फंस रहा है, क्यों इस महत्वपूर्ण पद को लटका कर रखा गया है, यह भाजपा के जिला स्तरीय नेता भी नहीं समझ पा रहे हैं. यह बात तो पूरी तरह से सच है कि बाबूलाल मरांडी की जगह अध्यक्ष पद पर किसी और की नियुक्ति होगी. लेकिन यह नियुक्ति फंसी हुई है. इतना तो तय माना जा रहा है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी किसी ओबीसी को मिलेगी. लेकिन ओबीसी में भी कई लोग सामने आ गए हैं. पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास जब पुनः भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी. तो उम्मीद लगाया जा रहा था कि प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनकी ताजपोशी होगी. लेकिन अंदर ही अंदर इस उम्मीद को उनके विरोधी खोखला कर दिए हैं. देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी किसके पास जाती है.

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो 


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