Jharkhand BJP Politics: उम्र सीमा को लेकर सोशल मीडिया पर क्यों है पार्टी कार्यकर्ताओं के निशाने पर, पढ़िए 

    Jharkhand BJP Politics: उम्र सीमा को लेकर सोशल मीडिया पर क्यों है पार्टी कार्यकर्ताओं के निशाने पर, पढ़िए 

    धनबाद(DHANBAD) : झारखंड में भाजपा संगठन पर पर्व मना रही है. पदाधिकारियों की उम्र सिमा को लेकर टीका-टिपण्णी शुरू हो गई है. सवाल पर सवाल दागे जा रहे है. सदस्यता अभियान के साथ बूथ से प्रदेश अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है. 22 दिसंबर से सदस्यता अभियान प्रारंभ किया गया है. पदाधिकारी के लिए उम्र सीमा भी तय की गई है. ख्याल रखा गया है कि अधिक से अधिक युवाओं की भागीदारी हो. निर्णय हुआ है कि भाजपा में 45 वर्ष से अधिक का मंडल अध्यक्ष नहीं होगा. जिला अध्यक्ष 60 वर्ष से अधिक का नहीं होना चाहिए. 50% से अधिक जिलों में निर्वाचन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रदेश अध्यक्ष के निर्वाचन का काम शुरू होगा. 

    प्रदेश अध्यक्ष के निर्वाचन की प्रक्रिया को पूरी करने के लिए केंद्र स्तर के पर्यवेक्षक पहुंचेंगे. दावा किया गया है कि अब तक तीन लाख से अधिक प्राथमिक सदस्य बन चुके है. इसको गति देने के लिए प्रदेश स्तर पर अलग से अभियान चलाने को लेकर रणनीति बनाई जा रही है. इधर, पदाधिकारियो के उम्र निर्धारण के लिए सोशल मीडिया पर टीका टिप्पणी शुरू हो गई है. आइये कुछ का हम यहां उल्लेख करते है. एक यूजर ने लिखा है कि भाजपा में मंडल अध्यक्ष बनने के लिए जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य है. इसके बाद टीका- टिप्पणी करने वालों का सिलसिला शुरू हो गया. 

    एक यूजर ने लिखा है कि 1932 का खतियान चाहिए. यह भी  लिखा गया है कि मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के लिए उम्र सीमा जरूरी नहीं है? लेकिन मंडल अध्यक्ष बनने के लिए 45 वर्ष की उम्र सीमा निर्धारित की गई है. एक यूजर ने लिखा है कि जिनका जन्म किसी माननीय के घर हुआ हो? उन पर नियम लागू नहीं होगा.  एक अन्य यूज़र ने लिखा है कि वह भी जन्मकुंडली वाला चाहिए. यह पंडित जी से बनवावल होखे के चाहीं, स्कूल वाला ना चली. आगे लिखा गया है कि जनप्रतिनिधि बनने के लिए क्या शर्ते हैं? फिर आगे लिखा गया है कि अध्यक्ष पद के लिए  प्रतियोगिता परीक्षा भी होनी चाहिए. 

    फिर लिखा गया है कि कोई नहीं, सभी भैया- दीदी को युवा अध्यक्ष बना दिया जाए. एक यूजर ने लिखा है कि बहुत कुछ जरूरी होगा अभी भाजपा में? फिर लिखा गया है कि चरित्र प्रमाण पत्र लगाना सख्त जरूरी होगा.  एक ने लिखा है कि चरित्रवान लोग के लिए राजनीति है ही नहीं.  जो भी हो लेकिन झारखंड में भाजपा की करारी हार के बाद कार्यकर्ता भी तरह-तरह के सवाल कर रहे है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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