झारखंड -बिहार के कांग्रेस अध्यक्ष पर तलवार,क्यों नारा बुलंद हो रहा -जात पर न पात पर, मोहर लगेगी हाथ पर!


धनबाद(DHANBAD): भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार झारखंड में कांग्रेस आलाकमान मंत्रियों को बदलने के पहले संगठन की चूड़ी टाइट कर सकता है. इसमें ,अगर प्रदेश अध्यक्ष को बदल दिया जाए, तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। यह काम निगम चुनाव के पहले हो सकता है. बहुत पहले से ही यह चर्चा चल रही है कि प्रदेश अध्यक्ष को बदला जा सकता है. इधर, कांग्रेस के नाराज विधायक दिल्ली पहुंचकर अपनी बातों से आलाकमान को भी अवगत कराया और संगठन और सरकार के एक्शन के बारे में भी जानकारी दी.
झारखंड में विधानसभा चुनाव हुए, उसके बाद निगम चुनाव होने जा रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के अंदर विवाद का सिलसिला थम नहीं रहा है. एक तरह से कहा जाए तो कांग्रेस के नेता, कार्यकर्ता, विधायक और मंत्रियों पर संगठन का नियंत्रण नहीं है और यही वजह है कि प्रदेश अध्यक्ष भी निशाने पर है. इधर, बिहार से भी एक बड़ी खबर निकल कर आ रही है कि बिहार में कांग्रेस में टूट की खबर से आलाकमान के कान खड़े हो गए हैं और शुक्रवार को कांग्रेस के विधायक, एमएलसी, सांसद एवं अन्य नेता शुक्रवार को दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की. कई नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष को बदल देने की मांग की.
अब उसके बाद बिहार के कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम की छुट्टी होने की चर्चा तेज हो गई है. सूत्रों के अनुसार बिहार में प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व में बदलाव के लिए एक सर्च कमेटी गठन करने की बात हो रही है. कमेटी की रिपोर्ट के बाद कोई निर्णय लिया जाएगा। यह बात भी उठी कि जिसको भी संगठन की जिम्मेवारी दी जाए, उनमें अनुभव और योग्यता भी होनी चाहिए। सिर्फ जाति के आधार पर किसी की नियुक्ति नहीं होनी चाहिए। स्वर्गीय इंदिरा गांधी के समय का नारा भी बैठक में उठा, एक समय था जब कांग्रेस का नारा था -जात पर न पात पर, मोहर लगेगी हाथ पर.
बिहार कांग्रेस में भी प्रदेश अध्यक्ष और कांग्रेस प्रभारी के खिलाफ मोर्चा खुल चुका है. चुनाव से पहले टिकट बंटवारे में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया. बिहार चुनाव में पार्टी के ख़राब प्रदर्शन के बाद विरोध और तेज हो गया है. दरअसल, पिछले कुछ दिनों से एनडीए के नेता चर्चा कर रहे हैं कि बिहार के कांग्रेस विधायक पाला बदलेंगे, इसके बाद कांग्रेस आला कमान सक्रिय हुआ है. इधर, झारखंड में भी विधायक नाराज हैं और उनकी नाराजगी कांग्रेस कोटे के मंत्रियों से लेकर संगठन तक है. ऐसे में बिहार के साथ-साथ झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष भी बदल दिए जाएं, तो कोई आश्चर्य नहीं।
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
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