झरियावासियों के लिए "झरिया" बना अभिशाप, सड़क जाम आंदोलन भी नहीं आ रहा काम

    झरियावासियों के लिए "झरिया" बना अभिशाप, सड़क जाम आंदोलन भी नहीं आ रहा काम

    धनबाद(DHANBAD):धनबाद की झरिया अब वहां रहने वाले लोगों के लिए अभिशाप बन गया है. दस-दस घंटे अगर बिजली नहीं रहे, सावन के पहली सोमवारी को भी जलापूर्ति नहीं हो ,तो इसे अभिशाप ही कहां जाएगा. कभी धनबाद की गौरव रही झरिया आज समस्याओं के मकड़जाल में फंस कर कराह रही है. रविवार को तो हद हो गई. सुबह 9 बजे से गायब बिजली देर रात तक नहीं लौटी.

    भीषण गर्मी में बिना बिजली के लोग त्राहि-त्राहि करते रहे लोग

    इस भीषण गर्मी में बिना बिजली के लोग त्राहि-त्राहि करते रहे. जामाडोबा जल संयंत्र में भी बिजली ठप होने से पानी सप्लाई बाधित हो गई. रविवार का पूरा दिन झरिया में पानी और बिजली के लिए त्राहि त्राहि होती रही. जामाडोबा फीडर में गड़बड़ी के कारण डीवीसी ने मेंटेनेंस के लिए ब्रेकडाउन लिया. दोपहर 3 बजे जब लाइन चालू हुई तो फिर गड़बड़ी आ गई. इसके बाद बिजली गायब हो गई. जामाडोबा में जैसे ही बिजली चालू हुई, चार्जर उड़ गया .उसके बाद मरम्मत का काम शुरू हुआ. लेकिन बिजली नहीं लौटी.

    झरिया बाजार से लेकर घरों तक अंधेरा पसर गया

    बिजली नहीं रहने से झरिया बाजार से लेकर घरों तक अंधेरा पसर गया. दुकानदार परेशान हो गए. इनवर्टर फेल कर गए. जनरेटर काम करना बंद कर दिए. समय से पहले ही दुकानदार अपनी दुकानें बंद कर चले गए. झरिया के लोगों को सावन की पहली सोमवारी को भी पानी नहीं मिल पाएगा. ऐसे में लोग क्या करें, क्या नहीं करें,उनकी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा है.

    दस-दस घंटे अगर बिजली नहीं रहती

    झरिया का हाल ऐसा क्यों हुआ है ,किसी का क्यों नहीं ध्यान है, यह बात लोगों के समझ में नहीं आ रही है. लोडिंग पॉइंट पर बात बात पर आंदोलन करने वाले, बड़ी-बड़ी घोषणाएं करने वाले लोग आज कहां हैं ,यह सवाल झरिया पिछले कई महीनों से पूछ रही है ,लेकिन जवाब देने वाला कोई सामने नहीं आ रहा है.

    रिपोर्ट:धनबाद ब्यूरो


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