रांची(RANCHI): नक्सलवाद खात्मे की अंतिम डेडलाइन आज है. 31 मार्च 2026 ही गृह मंत्रालय ने लाल आतंक के खात्मे की तारीख तय की है. लेकिन झारखंड में अभी भी बड़े माओवादी मौजूद है. एक करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा,असीम मण्डल के साथ 40 कैडर हथियार लेकर जंगल में घूम रहे है. जिसकी तलाश लंबे समय से सुरक्षा बल के जवान सारंडा में कर रहे है,. हलाकी एक ऑपरेशन मेधा बुरु में कई कामयाबी मिली है. इसके बावजूद सबसे बड़े कमांडर जंगल में मौजूद है.
अगर हम बात झारखंड की करें तो झारखंड के 24 में से 17 जिले नक्सल गतिविधि के लिए जाना जाता थे. इसके लेकिन समय के साथ साथ अलग अलग अभियान की शुरुआत हुई और लाल आतंक सिमटा गया. अब सिर्फ पश्चिमी सिंघभूम जिले के कुछ इलाकों में सीमीत है. सारंडा के छोटानगरा,टोटों समेत कुछ इलाके में नक्सल गतिविध बची है. जिसमें एक करोड़ के इनामी दो माओवादी है और उनके साथ करीब 40 का दस्ता है.
जिसमें एक करोड़ के इनामी पोलित ब्योरों सदस्य मिसिर बेसरा,सेंट्रल कमिटी सदस्य असीम मंडल उर्फ आकाश है. इनके साथ जंगल में 40 के करीब कैडर साथ है. जिनपर भी लाखों का इनाम है. जिसमें 25 लाख के इनामी अजय महतो उर्फ टाइगर,मोचू उर्फ मेहनत शामिल है. इसके अलावा 5-5 लाख के इनामी नक्सली मौजूद है.
बताया जाता है कि मिसिर बेसरा के साथ सभी माओवादियों का ठिकाना सारंडा का जंगल है. जहां सभी मौजूद है. जिनकी तलाश में सुरक्षा बल के जवान जंगल में अभियान चला रहे है. माना जा रहा है कि अब अभियान को और भी तेज किया जाएगा. जिससे माओवादियों को पूरी तरह से खत्म किया जा सके. लेकिन अभी भी पुलिस मुख्यालय अपील कर रहा है कि हथियार डाल कर मुख्यधारा में लौट जाए. और नई ज़िंदगी की शुरुआत करें.
Thenewspost - Jharkhand
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